जागरण संवाददाता, हापुड़ :

सदर तहसील क्षेत्र के गांव नान के निकट में नाले पर बने पुल का एक हिस्सा चार माह पहले टूटकर गिर गया था। इसके चलते इस पुल से गुजरने वाले 20 गांव के करीब 50 हजार लोगों को रोजाना जान जोखिम में डालकर पुल पार कराना पड़ रहा है। क्षेत्र के ग्रामीण इस पुल के दोबारा निर्माण को लेकर लगातार मांग कर रहे हैं। ग्रामीण पुल का निर्माण न होने पर विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का एलान भी कर चुके हैं। बावजूद इसके यह पुल आश्वासन के ढांचे पर झूल रहा है।

सदर तहसील और धौलाना विधानसभा क्षेत्र के गांव नान के निकट नाले पर बने पुल का एक हिस्सा चार माह पहले बारिश में टूटकर गिर गया था। यह पुल वर्ष 1956 में बना था तथा इसके इस्तेमाल का समय भी समाप्त हो चुका है। पुल का एक हिस्सा गिरने के बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना जिलाधिकारी और लोक निर्माण विभाग के अफसरों को दी। विभाग ने एक करोड़ 70 लाख रुपये का एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया। इसके लिए प्रशासन से लेकर शासन तक गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि पीडब्ल्यूडी ने पुल के दोनों तरफ दीवार लगाकर रास्ता बंद कर दिया था। तब एक माह तक ग्रामीण शहर जाने के लिए दूसरे रास्ते से आते-जाते थे। गांव में व्यक्ति की मौत होने पर उस दीवार को तोड़कर रास्ता बनाने को मजबूर कर दिया। जिससे व्यक्ति का शव शमशान घाट तक ले जाया जा सके। इस पुल से आवागमन न होने पर आठ किलोमीटर चलकर शमशान ले जाया जा सकता है। इस पुल का निर्माण न होने से करीब डेढ़ दर्जन गांवों के ग्रामीण परेशान हैं।

---- इन गांवों के ग्रामीण हैं परेशान --

नान, आलमपुर, फगौता, मिलक, नारायणपुर, करीमपुर, नंदपुर, बासतपुर, ढीकरी, कमरुद्दीन नगर, समाना, नंगला काशी, नंगला गज्जू, सिवाया, धौलाना एनटीपीसी आदि को यह गांव आपस में जोड़ता है। --

यह कहते हैं ग्रामीण - पुल क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। शासन और प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। - धर्मवीर फौजी, ग्रामीण

-- इस पुल के निर्माण के लिए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और लोक निर्माण विभाग के मंत्री तक से गुहार लगाई जा चुकी है। इस विधानसभा चुनाव में लोगों के लिए यह अहम मुद्दा है।

- नानक चंद शर्मा, संयोजक, पुल निर्माण संघर्ष समिति

-- पिछले दिनों सार्वजनिक पंचायत में आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का निर्णय लिया गया है। जिस पर ग्रामीण कायम हैं। - योगेंद्र शर्मा, ग्रामीण

-- यह पुल करीब 20 गांवों को आपस में जोड़ता है। रोजाना इस पुल से सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। बावजूद इसके शासन-प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।

-जवाहर, ग्रामीण

Edited By: Jagran