कर्ज में डूबा सिंभावली ग्रुप, बिकने जा रहीं यूपी की 3 बड़ी चीनी मिलें; 5 नवंबर को लगेगी बोली
कर्ज में डूबे सिंभावली ग्रुप की तीन चीनी मिलें, सिंभावली, बृजनाथपुर और चिलवरिया, बिक्री के लिए तैयार हैं। इन मिलों ...और पढ़ें

5 नवंबर को होगा मिलों का ऑक्शन।
HighLights
सिंभावली ग्रुप की तीन चीनी मिलें कर्ज में डूबीं।
5 नवंबर को सिंभावली, बृजनाथपुर, चिलवरिया मिलों की बोली।
नए खरीदारों से पेराई सत्र चलाने की एसओपी मांगी गई।
ठाकुर डीपी आर्य, हापुड़। जिस सिंभावली चीनी मिल ने वर्ष 1933 से किसानों के गन्ने को मिठास में बदला, अब उसी मिल का संचालन अधर में लटका है। अब मिल की कमान नए खरीदार के हाथों में जाने की तैयारी है। कर्ज के बोझ तले दबे सिंभावली समूह की तीनों चीनी मिलों की बिक्री प्रक्रिया तेज हो गई है।
सिंभावली और बृजनाथपुर के साथ बहराइच जिले की चिलवरिया चीनी मिल के लिए पांच नवंबर को बोली लगने की संभावना है। अब तक 25 बड़ी कंपनियों और औद्योगिक घरानों के प्रतिनिधिमंडल मिलों का दौरा कर चुके हैं।
मिले प्रबंधन सूत्रों के अनुसार न्यायालय से बिक्री प्रक्रिया को हरी झंडी मिलने के साथ ही अंतरिम समाधान पेशेवर (आइआरपी) की ओर से फार्म-जी जारी किया जा चुका है।
वहीं, शासन ने मिलों को खरीदने की इच्छुक कंपनियों से पेराई सत्र संचालित रखने की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) मांगी है। ऐसे में अब खरीदारों की दिलचस्पी के साथ ही इस बात पर भी नजर है कि नई व्यवस्था में मिलों का संचालन कब और किस तरह शुरू हो पाएगा।
नए खरीदार के सामने मिल चलाने की चुनौती
तीनों चीनी मिलों की बिक्री केवल स्वामित्व बदलने तक सीमित नहीं है। इनके संचालन से हजारों लोगों की रोजी-रोटी और क्षेत्र के गन्ना किसानों का हित जुड़ा है। किसानों को समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान मिलना और मिलों का नियमित संचालन सबसे अहम सवाल हैं।
शासन की ओर से एसओपी मांगे जाने को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, नए खरीदारों की ओर से संचालन को लेकर क्या योजना प्रस्तुत की जाती है, यह बोली प्रक्रिया के साथ ही स्पष्ट होगा।
इस सत्र में चलेगी मिल या करना होगा इंतजार
चीनी मिल का मौजूदा प्रबंधन अब इसे संचालित करने में असमर्थता जता चुका है। ऐसे में पांच नवंबर को संभावित बोली प्रक्रिया से मिलों के भविष्य को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। यदि बिक्री प्रक्रिया समय से पूरी होती है और नया खरीदार पेराई सत्र के संचालन की तैयारी कर लेता है, तो मिलों को इसी सत्र में चलाने की संभावना बन सकती है।
दूसरी ओर, प्रक्रिया में देरी होने पर किसानों और कर्मचारियों को इंतजार करना पड़ सकता है। फिलहाल, तीनों मिलों की अगली पारी नए खरीदार के फैसले और संचालन की तैयारियों पर निर्भर है।
हमने पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर गन्ना भुगतान किया है। हाईकोर्ट के मानकों के अनुसार भुगतान किया गया है। उसके बावजूद क्रय केंद्र काट दिए गए हैं। जब गन्ना ही नहीं मिलेगा तो मिल चलेगा कैसे? ऐसे में बिक्री ही एक मात्र विकल्प बचता है। अब अपना पक्ष न्यायालय और शासन के सामने रख रहे हैं।
- अनुराग गोयल, आईआरपी।
जानकारी में आया है कि मिल की बिक्री की जा रही है। आइआरपी ने इसके लिए प्रक्रिया आरंभ कर दी है। हमारा उद्देश्य मिल का संचालन कराना और किसानों का भुगतान कराना है। कोई भी चलाएं, इससे फर्क नहीं पड़ता।
- अंगद सिंह, जिला गन्ना अधिकारी।
