विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बिना कर्ज लिए ही दिवालिया होने की कगार पर 20 हजार किसान, क्या है सिंभावली शुगर मिल का पूरा मामला?

Published: Tue, 27 Oct 2026 04:49 PM (IST)

सिंभावली शुगर मिल द्वारा किसानों की सहमति के बिना उनके कागजात पर लिए गए कर्ज के कारण 20,000 किसान दिवालिया होने की कगार पर हैं।

मिल की फाइल फोटो। जागरण

मिल की फाइल फोटो। जागरण

HighLights

  1. किसानों के कागजात पर मिल ने लिया 148 करोड़ कर्ज।

  2. अब 20 हजार किसान 300 करोड़ के कर्ज से प्रभावित।

  3. सीबीआई जांच जारी, किसानों का भविष्य अधर में।

डीपी आर्या, हापुड़। सिंभावली शुगर मिल की चिमनी से उठने वाला धुआं थमा तो हजारों किसान बिना देनदारी के ही दिवालिया हो जाएंगे। इन किसानों को बैंक की मनमानी का वह खामिायाजा उठाना पड़ेगा, जिसके खिलाफ वह हाईकोर्ट तक लड़ रहे हैं।

दिवालिया घोषित होने के साथ ही इन किसानों को लगभग 300 करोड़ हो गया, वह कर्ज भी चुकाना पड़ेगा, जिसको उन्होंने कभी लिया ही नहीं था। शुगर मिल से जुड़ा पुराना बैंक ऋण विवाद अब उनकी जमीन और भविष्य पर सवाल खड़े कर रहा है।

वर्ष 2011 से 2015 के बीच मिल ने ऋण स्वीकृत कराने के मामले में 5,762 किसानों के भूमि-जोत और गन्ना आपूर्ति से जुड़े कागजात बैंक को दिए गए थे। आरोप है कि किसानों की सहमति के बिना इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर ऋण योजना के तहत 148.59 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया।

मामला कानूनी विवाद में उलझा है और किसानों की जमीन को बंधनमुक्त किए जाने को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। ऐसे में मिल के संचालन पर कोई संकट गहराता है तो गन्ना भुगतान, खेती की पूंजी और किसानों की आर्थिक सुरक्षा पर एक साथ चोट पड़ने की आशंका है।

यह था मामला

सिंभावली शुगर मिल पर गन्ना देने वाले किसानों को बैंक की ओर से बकाया जमा कराने को नोटिस 2016 में भेजे गए थे। इस पर किसानों ने बैंक से संपर्क करके बताया कि उन्होंने कभी कोई कर्ज ही नहीं लिया है। बैंक के स्तर से समाधान नहीं होने पर उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई।

जांच में सामने आया कि जिन किसानों को नोटिस मिले थे, वह सभी एक ही बैंक के खाताधारक थे। इन किसानों की संख्या 5762 मिली। इनके नाम पर 148.59 करोड़ रुपया निकाला गया था। यह रुपया सिंभावली शुगर मिल द्वारा किसानों की जमीन के फर्द, आधार कार्ड व अन्य कागजात जमा करके निकाला गया था।

यह कागजात किसानों से सस्ता उर्वरक देने के नाम पर लिए गए थे। वहीं बैंक के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से रुपया निकाला गया था।

हो चुकी है सीबीआई जांच

किसानों की शिकायत के बाद पहले इस मामले में मिल प्रबंधन पर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई। उसके बाद मामला आर्थिक अपराध शाखा और सीबीआई को सौंपा गया।

इस मामले में सीबीआई की जांच में भी सामने आया कि उक्त रुपया किसानों द्वारा नहीं लिया गया था। अभी तक इस मामले में निर्णय नहीं हो सका है।

5 हजार से कैसे प्रभावित किसानों की संख्या हो गई 20 हजार?

सीबीआई की ओर से यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। वहीं अब यह धनराशि बढ़कर 300 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। वहीं इस कर्ज से प्रभावित किसानों की संख्या पीढ़ी बदलने से 20 हजार से ज्यादा पर पहुंच गई है।

यह होगी परेशानी

अभी तक उक्त किसानों को बैंक की ओर से अन्य कोई ऋण नहीं दिया जा रहा है। यानि एक प्रकार से किसानों को बकाएदार-दिवालिया मान लिया गया है। हालांकि किसानों की आरसी जारी नहीं की गई है, लेकिन यदि मिल नहीं चलता है और बिक्री की स्थिति आती है तो किसानों पर देनदारी बकाया हो जाएगी। दरअसल मिल बैंकों का पहले ही काफी बड़ी धनराशि बकाया है। यदि मिल की बिक्री भी होती है तो किसानों का रुपया मिलना आसान नहीं होगा।

किसानों की जमीन को बंधक बनाकर मिल प्रबंधन ने रुपया निकाला है। ऐसे मामले में पूरी देनदारी मिल और बैंक की है। किसानों को कर्जमुक्त घोषित करके उनकी फर्द जारी की जाएं। किसानों का बहुत उत्पीड़न हो चुका है।

- अजय त्यागी - गन्ना किसान। 

हम 15 साल से उस कर्ज के नीचे दबे हैं, जो कभी हमने लिया ही नहीं था। इस मामले में मिल और बैंक के कर्मचारी दोनों ही अपराधी हैं। यदि बैंक बिकता है और किसानों से वसूली होती है तो हमको जमीन बेचनी पड़ेंगी।

- सुरेंद्र शर्मा - किसान।

यह मामला कारपोरेट आफिस का है। इसकोू आईआरपी के स्तर से देखा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर तथ्यात्मक जानकारी नहीं है। मुझको लगता है कि उक्त कर्ज को मिल ने अपने ऊपर ले लिया है।
- करन सिंह - मिल महाप्रबंधक।

किसानों की फर्द पर लिए गए कर्ज के बारे में अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं हैं। हम आइआरपी पर दबाव बना रहे हैं कि पहले किसानों का भुगतान करे। जब तक किसानों का गन्ना बकाया व फर्द ऋण विवाद का निस्तारण नहीं होगा, हम आइआरपी से कोई वार्ता नहीं करेंगे।
- अंगद सिंह - जिला गन्ना अधिकारी।

 

यह भी पढ़ें- सिंभावली और बृजनाथपुर शुगर मिल नहीं कर रहीं 320 करोड़ का पेमेंट, किसान बोले- बच्चों की पढ़ाई और शादी तक अटकी