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हापुड़ में चौथे नवरात्र पर मां कूष्मांडा की आराधना, मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़

By Harsh AgarwalEdited By: Sachin Jha
Published: Wed, 14 Oct 2026 01:23 PM (IST)

शारदीय नवरात्र के चौथे दिन हापुड़ के मंदिरों में मां कूष्मांडा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई, जहां सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

नवरात्र के अवसर पर मां चंडी मंदिर में पूजा अर्चना करती महिला श्रद्धालु। जागरण।

नवरात्र के अवसर पर मां चंडी मंदिर में पूजा अर्चना करती महिला श्रद्धालु। जागरण।

HighLights

  1. चौथे नवरात्र पर मां कूष्मांडा की विधि-विधान से पूजा।

  2. हापुड़ के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

  3. भक्तों ने सुख-समृद्धि और आरोग्य की प्रार्थना की।

हर्ष अग्रवाल, जागरण संवाददाता। शारदीय नवरात्र के चौथे दिन बुधवार को मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। देवी मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी।

श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर परिवार की खुशहाली, आरोग्य और सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। धार्मिक वातावरण के बीच घरों में भी पूजन, मंत्रोच्चार और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया गया।

मां कूष्मांडा हैं सृष्टि की आदिशक्ति 

ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पांडेय का कहना है कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति माना जाता है।

उन्होंने कहा कि देवी का स्वरूप तेज, ऊर्जा और दिव्यता का प्रतीक है। आठ भुजाओं वाली माता को अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा सहित विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं।

भक्तों को मिलती है सकारात्मक ऊर्जा

उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता है कि मां कूष्मांडा की सच्चे मन से आराधना करने पर भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में उन्नति का आशीर्वाद मिलता है।

ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पांडेय ने बताया कि इस अवसर पर माता को मालपुए का भोग लगाने की परंपरा भी प्रचलित है। पूजन के दौरान दीप प्रज्वलित कर पुष्प, फल, धूप और नैवेद्य अर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने दुर्गा चालीसा का पाठ करते हुए देवी से कष्टों के निवारण व मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की।

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