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आतंकियों का ठिकाना बन रहे हापुड़ की 360 स्क्रीन वाले कंट्रोल रूम से होगी निगरानी, जिले में 3000 से अधिक CCTV लगे

Published: Sat, 11 Apr 2026 12:48 PM (IST)

हापुड़, जो आतंकियों के लिए शरणस्थली रहा है, अब 3000 से अधिक सीसीटीवी कैमरों और 360-स्क्रीन वाले कंट्रोल रूम से ...और पढ़ें

मंडी में आरंभ किया गया प्रशासन का सीसीटीवी कंट्रोल रूम। जागरण

मंडी में आरंभ किया गया प्रशासन का सीसीटीवी कंट्रोल रूम। जागरण

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ठाकुर डीपी आर्य, हापुड़। दिल्ली के नजदीक होने से हापुड़ आतंकियों-देशद्रोहियों के लिए सुविधाजनक शरणस्थली रहा है। आतंकी संगठन हापुड़ में स्लीपर सेल तैयार करते रहे हैं। वहीं दिल्ली-हरियाणा के साथ ही हापुड़ से वेस्ट यूपी की कनेक्टीविटी अच्छी होने का लाभ भी उनको यहां खींचता रहा है। आतंकी हेडली ने हापुड़ में रुककर ही दिल्ली व ताजमहल की रेकी की थी।कनेक्टीविटी होने से आतंकी किसी भी वारदात को अंजाम देकर आसानी से हापुड़ में छिप सकते हैं।

पूरे जिले को सीसीटीवी से किया लैस

हापुड़ में ग्रामीण व बागबानी का बड़ा क्षेत्र होने के साथ ही गंगा का विस्तृत खादर क्षेत्र भी है। यह पहचान छिपाकर रहने में मददगार होता है। वहीं जिला मिली-जुली आबादी वाला है। ब्रजघाट जैसा पर्यटन स्थल होने से रोजाना हजारों लोग दूसरे राज्यों-जिलों से पहुंचते हैं।

आतंकियों पर नियंत्रण-निगरानी के लिए हापुड़ पर निगहबानी जरूरी है। यही कारण है कि शासन ने कैंट एरिया के पास ही एसएसएफ का कमांड रूम बनाने का निर्णय लिया है। वहीं अब प्रशासन ने पूरे जिले को सीसीटीवी की चाक-चौबंद कवरेज में ले लिया है।

तत्काल ली जा सकेगी मदद

जिला प्रशासन ने निगरानी की चाक-चौबंद व्यवस्था लागू की है। इसके तहत जिलेभर के प्रमुख स्थानों को तीन हजार से ज्यादा सीसीटीवी की मदद से निगरानी में लिया गया है। इन सभी को कंट्रोल रूम में लगाए गए 360 स्क्रीन से कनेक्ट किया गया है।

प्रशासन ने प्रमुख स्थानों व मार्गों पर लगे निजी कैमरों का एक्सस भी अपने पास ले लिया है। वहीं संबंधित क्षेत्र के तीन-तीन लाेगों के मोबाइन नंबर का गूगल चार्ट भी तैयार किया गया है। इससे कैमरों की लोकेशन व अन्य जरूरी बदलाव के लिए उनकी तत्काल मदद ली जा सकेगी।

लगातार सुधार किए जा रहे

वहीं, आसपास के थानों, चौकियों, सेवानिवृत अधिकारियों, सुरक्षा समितियों के सदस्यों व सेवानिवृत फौजियों-सामाजिक लोगों के मोबाइल नंबर भी जुटाकर सूची में रखे गए हैं। जिससे आपात स्थिति में किसी भी जरूरी कार्य के लिए उनकी मदद ली जा सके।

इस निगरानी में ब्रजघाट के गंगा मेले और कांवड़ यात्रा के मार्ग को भी लिया गया है। कंट्रोल रूम से अनौपचारिक कार्य आरंभ कर दिया है। अभी इसमें लगातार सुधार किए जा रहे हैं।

360 स्क्रीन कनेक्ट नेटवर्क तैयार

कंट्रोल रूम में 25 कर्मचारियों की तैनाती दिनरात रहेगी। वहीं पावर सप्लाई फेल होने या किसी एक कंपनी का नेट फेल हो जाने पर तत्काल दूसरी व्यवस्था भी तैयार रखी गई है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार यहां दो दशक में 84 आतंकी-देशद्रोही प्रवास कर चुके हैं।

ऐसे में सुरक्षा और निगरानी कड़े होने जरूरी है। जिसके लिए प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरों का 360 स्क्रीन कनेक्ट नेटवर्क तैयार किया है।जल्द ही इसको औपचारिक रूप से आरंभ किया जाएगा।

"कंट्रोल रूम के पीछे का मकसद बहुत बड़ा है। इसमें आतंकियों-संदिग्धों की निगरानी और धरपकड़ सबसे महत्वपूर्ण है। अभी इसको आरंभ किया गया है। इसका बड़ा विजन जल्द सामने आएगा। इस कंट्रोल रूम का स्वरूप प्रदेश के सभी संवेदनशीन जनपदों में लागू किया जाएगा। हम बहुत जल्द इसकी सभी फंक्शन आरंभ करने जा रहे हैं।"

-अभिषेक पांडेय, जिलाधिकारी।

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