हापुड़ के आलू किसानों पर मंदी की दोहरी मार, कर्ज में डूबे अन्नदाता
गढ़मुक्तेश्वर के आलू किसान मंदी की मार झेल रहे हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
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हापुड़ के आलू किसानों पर मंदी की दोहरी मार ( एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
आलू की मंदी ने किसानों को आर्थिक संकट में डाला।
शीतगृहों में एक लाख टन से अधिक आलू जमा।
पंजाब-हिमाचल से आवक से दाम और गिरेंगे।
ध्रुव शर्मा, गढ़मुक्तेश्वर। गन्ना एवं धान का उत्पादन आधा रहने से पहले से ही परेशान किसानों के सामने आलू की मंदी ने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
बाजार में आलू के दाम उचित नहीं मिलने के कारण इस बार भी किसानों का आलू शीतगृह में ही सड़ने की संभावना बढ़ गई है। पंजाब एवं हिमाचल के आलू आने में मात्र दो सप्ताह का समय रह गया है। लेकिन, जिले के शीतगृहों में एक लाख मीट्रिक टन से अधिक आलू में भरा पड़ा है।
किसान झेल रहे मंदी की मार
पिछले तीन वर्षो से मंदी की मार झेल रहे किसानों को एक बार फिर मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। इस वर्ष जिले के 20 शीतगृह में दो लाख चार मीट्रिक टन आलू का भंडारण हुआ था।
वर्तमान में जिले के शीतगृह में करीब एक लाख चार हजार मीट्रिक टन आलू भरा हुआ है। त्योहारों के कारण वर्तमान में बाजार के अंदर चिप्सोना आलू की कीमत 100 रुपये बढ़कर करीब 900 रुपये प्रति क्विंटल तक बामुश्किल है, जबकि दूसरे आलू की कीमत तो 600 से 700 रुपये प्रति क्विंटल तक रह गई है।
शुरू हो जाएगी आलू की आवक
शीतगृह में एक क्विंटल साधारण आलू का किराया 260 एवं मोटा आलू का किराया 285 रुपये प्रति क्विंटल तक हैं। नवंबर के प्रथम सप्ताह में पंजाब एवं हिमाचल के आलू की आवक शुरू हो जाएगी।
ऐसे में बाजार में आलू के दाम में गिरावट आना तय है। आलू में छाई मंदी के कारण किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
यदि दो सप्ताह के अंदर आलू के दाम में सुधार नहीं हुआ तो किसानों का लाखों क्विटल आलू शीतगृह में ही रहने की संभावना बन जाएगी। ऐसे में किसानों को भारी नुकसान होने की संभावना है।
बिचौलिए मालामाल
शीतगृह से किसानों का चिप्साेना आलू बामुश्किल नौ रुपये प्रति क्विंटल की दर पर बिक रहा है। इसमें किसान की लागत से लेकर तमाम दूसरे खर्चे है। जबकि आम उपभोक्ता को यह आलू 16 रुपये प्रति किलो मिल रहा है।
वहीं, सामान्य आलू के दाम किसान को छह से सात रुपये मिल रहे हैं, तो वहीं बाजार में वहीं आलू आम आदमी को 14 रुपये प्रति किलो में मिल रहा है।
यानि मेहनत करने वाले अन्नदाता को मुनाफा तो दूर लागत तक नहीं मिल रही है, तो वहीं बिचौलिए जमकर मुनाफा कमा रहे हैं। हालात इतने बदतर है कि किसान बच्चों की पढ़ाई, बेटियों के हाथ पीले तथा बैंकों से लिया कर्ज तक जमा नहीं कर पा रहे हैं।
इस तरह समझें
मंदी की मार को देखते हुए किसानों को सरकार द्वारा शीतगृह भंडारण के किराए में छूट दी गई है। नवंबर के प्रथम सप्ताह में पंजाब एवं हिमाचल का आलू आने की संभावना है। ऐसे में किसानों को सहीं समय पर अपना आलू निकालने पर विचार करना चाहिए। - डॉक्टर हरित कुमार, जिला उद्यान अधिकारी
