सैकड़ों किलो पनीर रोज बनाया, दूध कहां से आया कोई बता न पाया; खाद्य विभाग की छापामारी में चौंकाने वाला खुलासा
हापुड़ में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में 18 पनीर इकाइयां दूध खरीद का रिकॉर्ड नहीं दिखा पाईं, जबकि वे रोजाना सैकड़ों किलो पनीर बना रही थीं।

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड
HighLights
हापुड़ में 18 पनीर इकाइयों पर खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच।
रोजाना सैकड़ों किलो पनीर बनाने वाली इकाइयां दूध का रिकॉर्ड नहीं दे पाईं।
कई जगह पनीर बदबूदार और अस्वच्छ स्थानों पर बनता मिला।
ठाकुर डीपी आर्य, हापुड़। जिले में पनीर की बढ़ती खपत के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच ने निर्माण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच के दौरान 18 पनीर निर्माण इकाइयां रोजाना सैकड़ों किलो पनीर तैयार करने के बावजूद यह बताने में असमर्थ मिलीं कि इसके लिए दूध कहां से खरीदा गया।
विभाग के सामने इन इकाइयों की ओर से दूध खरीद का रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया जा सका। अब विभाग ने संबंधित फर्मों को नोटिस जारी कर दूध खरीद और पनीर उत्पादन का पूरा डाटा मांगा है।
बदबूदार स्थानों पर तैयार होता मिला पनीर
इतना ही नहीं, कई इकाइयों में तालाबों के किनारे, कबाड़ के ढेर और बदबूदार स्थानों पर पनीर तैयार होता मिला, जिससे खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर संबंधित फर्मों पर जुर्माना लगाने के साथ पनीर निर्माण पर रोक और लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के दौरान केवल दूध खरीद का रिकार्ड ही सवालों के घेरे में नहीं आया, बल्कि कई इकाइयों में पनीर निर्माण की स्थिति भी चिंताजनक मिली।
कुछ स्थानों पर तालाबों के किनारे, कबाड़ के ढेर के पास और बदबूदार वातावरण में पनीर तैयार किया जा रहा था। ऐसे स्थानों पर खाद्य पदार्थ का निर्माण होने से उसकी गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग के अधिकारियों ने ऐसी यूनिट को स्वच्छ क्षेत्र में स्थानांतरित करने तक निर्माण पर रोक लगा दी है।
दूध खरीद का रिकॉर्ड नहीं करा सके उपलब्ध
अधिकारियों के अनुसार पनीर बनाने के लिए प्रतिदिन बड़ी मात्रा में दूध की आवश्यकता होती है। ऐसे में इकाइयों द्वारा सैकड़ों किलो पनीर तैयार करने के बावजूद दूध खरीद का रिकार्ड उपलब्ध न कराया जाना जांच का अहम बिंदु है।
विभाग अब नोटिस के माध्यम से संबंधित फर्मों से यह जानकारी मांग रहा है कि उन्होंने किससे, कितनी मात्रा में और किस दर पर दूध खरीदा। साथ ही दूध की खरीद के मुकाबले कितना पनीर तैयार किया गया, इसका भी पूरा ब्योरा मांगा गया है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित फर्मों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। यदि नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत जुर्माना लगाने के साथ अन्य कार्रवाई की जाएगी।
मानकों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित इकाइयों में पनीर निर्माण पर रोक लगाने और लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
दूध की खरीद और पनीर उत्पादन का होगा मिलान
खाद्य सुरक्षा विभाग अब इकाइयों से मिले दूध खरीद के आंकड़ों और पनीर उत्पादन के दावों का मिलान करेगा। इससे यह पता लगाने का प्रयास होगा कि घोषित दूध खरीद के अनुरूप ही पनीर तैयार किया गया या उत्पादन में किसी अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया गया। विभाग की कार्रवाई से पनीर कारोबारियों में खलबली मची हुई है।
किसी भी हाल में स्वास्थ्य मानकों से खिलवाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी। पनीर जैसा उत्पाद किसी हाल में अधोमानक स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि दूध ही नहीं ले रहे हैं तो पनीर कैसे बनाया जा रहा है। नोटिस का उत्तर मिलने के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- चंद्रशेखर मिश्रा, उपायुक्त, खाद्य सुरक्षा।
