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धान के अच्छे दाम भी नहीं पोंछ पाए किसानों के आंसू, गढ़मुक्तेश्वर में नई बीमारी ने बर्बाद की 22 हजार हेक्टेयर फसल

Published: Thu, 24 Sep 2026 03:30 PM (IST)

हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर में धान के अच्छे दाम मिलने के बावजूद किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं। फसल में रूट ...और पढ़ें

इस वर्ष धान के दाम हाई, बीमारी से उत्पादन रह गया तिहाई

इस वर्ष धान के दाम हाई, बीमारी से उत्पादन रह गया तिहाई

HighLights

  1. धान के अच्छे दाम भी किसानों को नुकसान से नहीं बचा पाए।

  2. रूट वीविल जैसे नए कीटों ने फसल उत्पादन में भारी गिरावट की।

  3. 22 हजार हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित, हजारों किसान परेशान।

ध्रुव शर्मा, गढ़मुक्तेश्वर(हापुड़)। पिछले कई वर्षाे से धान के कम दाम के कारण नुकसान झेल रहे किसानों को इस बार फसल में लगी बीमारी ने झटका दे दिया है। मंडी में इस बार धान के दाम ठीक होने के बावजूद किसानों को नुकसान का दंश झेलना पड़ रहा है। इसके पीछे बीमारी के कारण फसल के उत्पादन में आई भारी गिरावट है।

जिले में इस वर्ष करीब 22 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की गई थी। इस खेती से 30 हजार किसान जुड़े हुए है। इस बार शुरूआत में ही बासमती धान के दाम 3500 से 3800 रुपये प्रति क्विंटल है। धान के दाम ठीक होने के कारण किसानों में खुशी जाग गई थी कि इस बार उनको धान से आय प्राप्त हो जाएगी।

लेकिन कटाई एवं निकासी के समय ही किसानों की यह खुशी गायब हो गई। दरअसल धान की फसल प्रति बीघा (पांच बिस्वा) में चार क्विंटल तक निकल जाती है। लेकिन इस बार धान का उत्पादन डेढ़ से दो क्विंटल तक सिमट कर रह गया है। इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।

उत्पादन कम होने के पीछे सबसे बड़ा है ये कारण

उत्पादन कम होने के पीछे सबसे बड़ा कारण इस बार जिले में पहली बार आए रूट वीविल कीट (चावल के दाने के बराबर सूंडी) ने जमकर तबाही मचाई। यह कीट बोआई के समय ही आ गया था, इसने पौधे की जड़ में घुंसकर ग्रोथ को रोक दिया। जब तक वैज्ञानिक एवं किसान इसको समझ पाते तब तक इसने काफी तबाही मचा दी थी।

इसके बाद कालर रोट (सीट ब्लाइट) ने फसल को अपंग बना दिया। रही सही कसर अंत में तना छेदक ने कहर बरपाया। इस बीमारी ने तने में घुंसकर रस चूस लिया, जिससे धान की बाली सूख गई। इन बीमारियों का असर सीधे तौर पर उत्पादन पर पड़ा। इससे किसानों के होश उड़ गए है।

मैंने नौ बीघा धान की बोआई की थी, लेकिन उनके खेत में मात्र 11 क्विंटल धान निकली है। बीमारियों का अधिक प्रकोप था। अनेक स्प्रे किए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। ऐसे में उनकाे आमदनी तो दूर लागत तक नहीं मिली है।

- सोमपाल सिंह, किसान हरौड़ा

इस वर्ष धान में अधिक बीमारी रही है। इसके कारण लागत काफी बढ़ गई, लेकिन उत्पादन काफी कम हो रहा है। इससे किसानों को नुकसान हो रहा है।

- सरनजीत सिंह, किसान भगवंतपुर

इस तरह समझे एक बीघा में लागत एवं आमदनी

  • बीज - 300 रुपये
  • जुताई - 600
  • सिंचाई - 1200
  • रोपाई - 750
  • डीएपी - 300
  • यूरिया - 270
  • दवाई - 1200
  • कटाई - 700
  • ढुलाई - 100
  • आढ़त - 100
  • जमीन लगान - 3500
  • कुल लागत - 9020 रुपये

नोट: यानि एक बीघा धान में लागत करीब 9020 रुपये आ रही है। इसमें किसान की अपनी निराई, गुड़ाई तथा स्प्रे आदि करने की मेहनत नहीं जोड़ी गई है। वहीं अधिकतम डेढ़ क्विंटल धान की कीमत इसमें जोड़ दी जाए तो वह 5250 रुपये बैठती है। ऐसे में संपूर्ण मेहनत एवं लागत लगाने के बाद भी किसान को 3770 रुपये का नुकसान हुआ।

जिले में पहली बार रूट वीविल कीट का प्रकोप हुआ है। इसने धान की फसल में ग्रोथ नहीं होने दिया। जब तक किसान एवं वैज्ञानिकों को पता चलता फसल में काफी नुकसान हो चुका था।

- वैज्ञानिक डॉक्टर अरविंद कुमार, केवीके