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मेरठ, हापुड़ और बुलंदशहर के लोगों के लिए बदला गढ़गंगा मेले का रास्ता, क्या है वापसी का नया रूट?

Published: Wed, 28 Oct 2026 08:15 PM (IST)

गढ़मुक्तेश्वर कार्तिक पूर्णिमा मेले में भीड़ प्रबंधन के लिए नई यातायात व्यवस्था लागू की जा रही है। मेरठ, हापुड़ और ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड।

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड।

HighLights

  1. मेरठ के श्रद्धालुओं की वापसी शाहपुर चौधरी गांव के रास्ते होगी।

  2. बुलंदशहर के श्रद्धालु काकाठेर की मंढैया से होकर निकलेंगे।

  3. हापुड़, गाजियाबाद के लिए मुख्य मेला मार्ग का उपयोग होगा।

संवाद सहयोगी, गढ़मुक्तेश्वर। कार्तिक पूर्णिमा मेला शुरू होने में अब दो सप्ताह से भी कम का समय रह गया है। ऐसे में पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा, जाम, व्यवस्था आदि को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी है।

पहली बार मुख्य सदर, मेरठ एवं बुलंदशहर के श्रद्धालुओं को वापसी के समय अलग- अलग मार्ग से निकालने की व्यवस्था को अमल में लाने की तैयारी की जा रही है। 

महाभारत काल से लग रहा गढ़ गंगा मेला

गढ़मुक्तेश्वर के गंगा खादर में महाभारत काल से ही कार्तिक पूर्णिमा मेला लगता चला आ रहा है। इस मेले में 30 लाख से अधिक श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए आते हैं। मेले में मुख्य सदर के साथ ही बुलंदशहर, मेरठ आदि सेक्टर को बसाया जाता है।

मुख्य सदर में जहां हापुड़, गाजियाबाद,नोएडा, दिल्ली, राजस्थान आदि से आने वाले श्रद्धालु ठहरते हैं तो वहीं मेरठ एवं बुलंदशहर सेक्टर में इन दोनों जिलों के लोग ठहरते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा मेले में पूर्णिमा के दिन मुख्य स्नान के बाद वापसी करने के दौरान लगने वाले जाम को लेकर पुलिस ने नई रणनीति बनाई हैं। अभी तक मेले से निकलने वाले श्रद्धालु एक साथ मुख्यत मेला मार्ग से ही निकलते रहे हैं।

जाम लगने से होता है बुरा हाल

ऐसे में यहां जाम लगने से बुरा हाल हो जाता था। लेकिन पुलिस की नई रणनीति में मेरठ, हापुड़ एवं बुलंदशहर सेक्टर से निकलने वाले लोगों को अलग- अलग मार्ग से निकाला जाएगा।

हापुड़, गाजियाबाद की तरफ से जाने वाले श्रद्धालुओं की वापसी मुख्य मेला मार्ग यानि नक्का कुआं मार्ग से होगी। तो वहीं मेरठ सेक्टर के श्रद्धालुओं को शाहपुर चौधरी गांव से निकालते हुए गढ़-मेरठ मार्ग पर पहुंचाया जाएगा।

वहीं बुलंदशहर सेक्टर के श्रद्धालुओं को काकाठेर, शेरा कृष्णा वाली मंढैया से मीरा रेती मार्ग से निकालते हुए दिल्ली लखनऊ हाईवे पर पहुंचाया जाएगा। इसके लिए मेले के सभी मार्गो पर पुलिस कर्मियों को तैनात किया जाएगा।

चतुर्दशी की दोपहर से लगता है जाम

जो लोग एक वर्ष के अंदर मृत्यू को प्राप्त हो जाते हैं। चतुर्दशी की शाम उनके स्वजन मृत आत्मा की शांति के लिए गंगा में दीपदान करते हैं। ऐसे में यह लोग दोपहर से ही मेले में पहुंचना शुरू हो जाते हैं। दोपहर से लेकर शाम तक करीब पांच से सात लाख लोग मेला मार्ग पर पहुंच जाते हैं, जिसके कारण इस मार्ग पर जाम लगना शुरू हो जाता है।

दोपहर में मेले वाले रास्ते पर जाम शुरू हो जाता है। मध्य रात्रि के बाद से गंगा स्नान कर अनेक श्रद्धालु मेले से वापसी शुरू कर देते हैं। ऐसे में चतुर्दशी से शुरू हुआ जाम पूर्णिमा की देर रात तक लगा रहता है। यहां चार किलोमीटर की दूरी तय करने में लोगों को कई बार घंटों का समय लग जाता है।

इस बार मेरठ एवं बुलंदशहर सेक्टर के लोगों को अलग- अलग मार्ग से निकाला जाएगा। वहीं सदर में रहने वाले लोगों को मुख्य मेला मार्ग से वापस कराया जाएगा। इसके लिए पुलिस ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है।

- राहुल यादव, पुलिस क्षेत्राधिकारी

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