जागरण संवाददाता, हापुड़ :

दलहन के स्टाक को लेकर शासन द्वारा की गई सख्ती का आसार बाजार पर दिखने लगा है, जिले में दालों के दाम अब आसमान नहीं छू रहे हैं। इसकी पुष्टि शासन के आदेश पर पूर्ति विभाग द्वारा किए गए सर्वे में हुई है। सर्वे में सरकार द्वारा निर्धारित रेटों पर दाल की मांग नहीं की है। इसका मुख्य कारण है कि बाजार में दालों के रेट अब आसमान नहीं छू रहे हैं।

सरकार ने पिछले दिनों दालों के स्टाक को लेकर सख्ती शुरू की थी। इसके लिए जिले पर गठित टीमों के द्वारा व्यापारियों को स्टाक सार्वजनिक करने के निर्देश दिए थे। साथ ही स्टाक की सीमा भी निर्धारित की, जिसके बाद से दालों के रेटों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। अब एक बार फिर शासन ने महंगाई की मार झेल रहे परिवारों को राहत देने की कवायद शुरू की है, जिसके क्रम में पिछले दिनों जिले से दाल की मांग का ब्योरा मांगा था। उसी के अनुसार जिले को दालों का आवंटन किया जाना था। इसमें कालाबाजारी न हो, इसे रोकने के लिए इसका वितरण डेयरी व उद्यान विभाग के फुटकर आउटलेट से किया जाना था। पूर्ति विभाग ने इसका सर्वे कराकर रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इसलिए शासन से मांगा गया डेटा शून्य भेजा गया है। क्योंकि लोकल स्तर पर इसके लिए कराए गए सर्वे पर सरकार के रेट पर दाल लेने में लोगों ने रुचि नहीं दिखाई है। बाजार भाव व सरकार के भाव में केवल दो से तीन रुपये का ही अंतर आ रहा है। इसलिए लोग कम रुचि दिखा रहे हैं, जिला पूर्ति अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि शासन ने विभाग से दालों की मांग का तहसीलवार ब्योरा मांगा था। सरकार ने यह कदम दालों के मूल्य को नियंत्रित करने के लिए उठाया है। भारत सरकार द्वारा अभी मसूर की दला का दाम निर्धारित किया गया है। इसके तहत मसूर साबुत 65 रुपये प्रति किलो, मसूर दाल 67 रुपये प्रति किलो, मसूर मलका 69 रुपये प्रति किलो में आउटलेट पर बेची जाएगी, लेकिन जिले से मांग शून्य में भेजी गई है।

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