हापुड़ [आदित्य त्रिपाठी]। मोक्षदायिनी मां गंगा के तट से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अपने उद्बोधन में मुज्जफरनगर के दंगों से लेकर गंगा एक्सप्रेस-वे तक की बात कहकर लखनऊ फतह का संदेश दिया। उन्होंने सपा, बसपा व कांग्रेस पर जमकर हमला बोलते हुए कहा कि जिनकी टोपी मुजफ्फरनगर के सचिन और गौरव के खून से दागदार हो वह ईमानदार नहीं हो सकते। जिन लोगों ने कैराना में लोगों को पलायन के लिए मजबूर किया था उन्हें ही सपा ने प्रत्याशी घोषित किया है।

मुजफ्फरनगर का कवाल वह गांव है जहां बहन की इज्जत बचाने गए दो ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या कर दी गई थी। हत्याकांड के बाद नफरत की ¨चगारी से कई सालों तक दंगे होते रहे। दंगों के जिम्मेदारों को विपक्ष सीने से लगा रहा है। पिछली सरकारों ने धर्म और जाति के आधार पर विकास का बंटवारा किया। उनमें विकास को लेकर सोच नहीं थी। नतीजा अपराध चरम पर था और अपराधी सरकारी कोठियों में आराम करते थे। इतना ही नहीं, सैफई से बैठकर लखनऊ की राजनीति की जाती थी।

आम जनता गरीबी व लाचारी का दंश झेल रही थी वहीं सफैई में रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन होता था। बहू-बेटियां घर की दहलीज लांघने से डरती थीं। लेकिन आज ऐसा नहीं है। अब बेटियां बेखौफ होकर घरों से निकलती हैं। सहारनपुर की याद आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है, जहां सिख विरोधी दंगा कराकर राजनीतिक रोटियां सेंकी गई थी। आज उन लोगों को सपा के मुखिया गले लगा रहे हैं।

उन्हें विकास, सुरक्षा व रोजगार से नहीं, अपराधियों से मतलब है। इन अपराधियों के दम पर वह प्रदेश में राज करना चाहते हैं। 2004 से 2017 तक गरीब तबके के लोगों के पास एक मकान तक न था। लेकिन भाजपा सरकार ने लोगों के आशियाने के सपने को साकार किया है। 45 लाख लोग आज अपने पक्के घरों में रह रहे हैं।