जागरण संवाददाता, हापुड़

गर्भवती महिलाएं अब निजी लैबों में निश्शुल्क अल्ट्रासाउंड करा सकती हैं। अल्ट्रासाउंड के खर्चा का पूरा भुगतान स्वास्थ्य विभाग करेगा। यह सुविधा गढ़मुक्तेश्वर और धौलाना में शुरू हो चुकी है। इसके लिए निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों को चिह्नित किया गया है। हापुड़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड की सुविधा होने के कारण अभी यह सुविधा यह शुरू नहीं हुई है।

कोरोना संक्रमण का प्रभाव कम होते ही अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर भी ध्यान देना शुरू हो गया है। इसी कड़ी में जननी सुरक्षा कार्यक्रम के चलते योजना शुरू हुई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत जननी सुरक्षा कार्यक्रम में निश्शुल्क अल्ट्रासाउंड जांच का प्रावधान भी जोड़ा गया है। गर्भवती महिलाओं की निश्शुल्क अल्ट्रासाउंड जांच हापुड़ के गढ़ रोड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में होती थी या फिर निजी लैब में महंगे दामों पर होती थी, जिसके कारण गढ़मुक्तेश्वर, पिलखुवा, धौलाना की गर्भवती महिलाओं को भी हापुड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आना पड़ता था। जिसके कारण महिलाओं को काफी अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ा था, लेकिन अब चलाई गई योजना के अंतर्गत गढ़मुक्तेश्वर और धौलाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नजदीक अल्ट्रासाउंड संचालक से पीपीपी (प्राइवेट पब्लिक पार्टनशिप) के तहत अनुबंध किया गया है। इसमें अल्ट्रासाउंड संचालक को प्रति गर्भवती जांच के एवज में 255 रुपये दिए जा रहे हैं। निश्शुल्क अल्ट्रासाउंड के लिए सरकारी अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा तीन पर्चे बनाए जा रहे हैं। इसमें एक गर्भवती के पास, एक अल्ट्रासाउंड संचालक और एक पर्ची डाक्टर के पास रहता है। भुगतान हर महीने के अंतिम सप्ताह में किया जा रहा है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रेखा शर्मा ने बताया कि गढ़मुक्तेश्वर और धौलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड मशीन न होने के कारण गर्भवती महिलाओं के निश्शुल्क अल्ट्रासाउंड निजी लैब में कराने की सुविधा है। जनपद में चलाए जा रहा जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत गर्भवती को पांच प्रमुख सेवाएं स्वास्थ्य विभाग की ओर से निश्शुल्क दी जाती हैं। इसमें परिवहन सेवा, भोजन व्यवस्था, उपचार, जांचे व प्रसव के दौरान जरूरत पड़ने पर खून भी देना शामिल है। उन्होंने बताया कि गर्भवती का नौ माह के भीतर दो बार अल्ट्रासाउंड से जांच होती है। पहला शुरुआत के महीनों में और दूसरा पांच माह बाद। उन्होंने बताया कि गर्भवती का दूसरा अल्ट्रासाउंड बेहद जरूरी होता है। इसमें बच्चे में जन्मजात बीमारी की जानकारी हो जाती है।

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