जागरण संवाददाता, हापुड़:

गरीबी की मार और पुत्री की शादी की जिम्मेदारी के बोझ तले दबकर चार साल पहले मृतक ओमप्रकाश ने घर छोड़ दिया। नौकरी के लिए वह हापुड़ आ पहुंचा और आढ़त पर दिन रात मेहनत कर रुपये जमा करने लगा, लेकिन उसे नहीं पता था कि वह अपनी पुत्री की शादी नहीं कर पाएगा।

ओमप्रकाश की पत्नी कमलेश ने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह दनकौर में किराये के मकान में रह रही थी। दो पुत्र और दो पुत्री को किसी तरह वह पढ़ा लिखा रही थी। पुत्री के शादी योग्य होने की चिता ओमप्रकाश को सताती रहती थी। इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए उसने चार वर्ष पहले घर छोड़ दिया। उसने बताया कि वह दोनों पुत्रों के साथ किसी तरह घर का खर्च चला रही थी। उसका पति पुत्री की शादी करने के लिए धन एकत्र करने के उद्देश्य से दिन-रात मेहनत कर रहा था।

रक्षा बंधन के त्योहार पर वह अपने परिवार से मिलने गया था। पत्नी ने घर की हालत की जानकारी देते हुए ओमप्रकाश से कुछ रुपयों की मांग की तो उसने कहा कि पुत्री की शादी करनी है। इस लिए वह अपनी मेहनत की कमाई अपने मालिक के पास जमा कर रहा है। पत्नी को नहीं पता था कि त्योहार मनाकर वापस काम पर जा रहा पति अब कभी लौटकर नहीं आएगा। ओमप्रकाश की मौत पर परिवार दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर हो गया है।

Posted By: Jagran

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