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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 06, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मेरा स्वर है कलमकार का, नहीं दबा हूं, नहीं दबूंगा

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Published: Mon, 06 Apr 2015 11:32 PM (IST)

हापुड़: सोमवार को चैंबर आफ कामर्स में ¨हदी साहित्य परिषद द्वारा प्रकाशित एवं कवि प्रेम निर्मल द्वारा

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हापुड़: सोमवार को चैंबर आफ कामर्स में ¨हदी साहित्य परिषद द्वारा प्रकाशित एवं कवि प्रेम निर्मल द्वारा संपादित काव्य संकलन कलम पच्चीसी का विमोचन हुआ। जिसमें 25 कवियों की रचनाएं संकलित हैं।

आयोजित कार्यक्रम में डा. रमा सिंह ने कविता प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमने देखे हैं बहुत ही पास, जिंदगी में हादसे ही हादसे एक सागर पी गया नदियों का जल, उनकों क्या मतलब किसी की प्यास से। कवि प्रेम निर्मल ने प्रस्तुत करते हुए कहा मेरा स्वर है मेरा कलमकार का, नहीं दबा हूं, नहीं दबूंगा कल भी तोड़ी थी चट्टाने फिर उभरीं तो फिर तोड़ूंगा। कवि आशुतोष आजाद ने कहा भाई चारे को बढ़ाओ दोस्तों, एकता के गीत गाओ दोस्तों, चल रही हैं नफरतों की आंधियां, प्यार का दीप जलाओ दोस्तों। इस दौरान कवियों ने कार्यक्रम में समां बांधते हुए अतिथियों का मंत्रमुग्ध कर दिया। काव्य संकलन कलम पच्चीसी का विमोचन करते हुए समाजसेवी भगवत प्रसाद कली वालों ने कहा कि कविताओं से जीवन में अलग ही आनंद आता है। कवियत्री डा. रमा सिंह को काव्य सिंधु, कवि प्रेम निर्मल को उनके खंड काव्य गुमनाम विक्रमादित्य के लिए काव्य बृहस्पति, डा. वागीश दिनकर को आचार्य कैलाश आजाद की साहित्य क सम्मान तथा मुशर्रफ चौधरी को काव्य श्री सम्मान से नवाजा गया।

इस दौरान कवि विजय वत्स, मोहनलाल तेजयान, इंद्रपाल सिंह, रामआसरे गोयल, कमलेश फर्रुखाबादी, मधु मित्तल, डा. पूनम ग्रोवर, महावीर वर्मा मधुर ने भी कविता प्रस्तुत की।