संवाद सूत्र, इचौली (हमीरपुर) : बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य इचौली व गुसियारी गांव के भूमि अधिग्रहण में फंस गया है। अधिग्रहण का कोई दस्तावेज व धनराशि न मिलने से नाराज जमीन मालिकों ने गुरुवार को काम रुकवा दिया। अधिकारियों ने मुआवजा राशि ट्रेजरी में जमा होने की जानकारी देकर शुक्रवार को कागजात देने का भरोसा दिलाया लेकिन अड़े जमीन मालिकों ने काम शुरू नहीं होने दिया।

गुसियारी निवासी किसान जमीरउद्दीन, हिलालुद्दीन, मेराजुद्दीन व इचौली निवासी किसान योगेंद्र कुमार, राजेश कुमार,शैलेन्द्र कुमार, लक्ष्मी देवी पत्नी विजय प्रकाश, ओमप्रकाश गुरुवार सुबह निर्माण स्थल पहुंचे। उन्होंने काम बंद करने को कहा। इस पर वहां काम करा रहे आरएल कनौजिया ने ठेकेदार को जानकारी दी। ठेकेदार से सूचना पाकर अफसरों में खलबली मच गई। इचौली लेखपाल कैलाश साहू व गुसियारी लेखपाल साजन मौके पर पहुंचे और किसानों की बात की, उन्होंने तहसीलदार मौदहा रामानुज शुक्ला से मोबाइल फोन पर बात कराई। जिस पर किसानों ने कहा कि कई बार डीएम, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी तथा आयुक्त से शिकायत के बावजूद आपत्तियों का निस्तारण नहीं हुआ और न ही अभी तक अधिग्रहण के संबंध में कोई भी लिखित दस्तावेज मिला है। जमीन बिना बताए कैसे अधिग्रहीत कर ली गई। अभी तक धन भी नहीं मिला है। इस पर तहसीलदार ने कहा कि अधिग्रहण की सूचना दी जा चुकी थी और मुआवजा राशि ट्रेजरी में जमा है। शुक्रवार को भूमि अधिग्रहण के कागजात मिल जाएंगे। किसानों ने कहा कि जमीन मटौंध-कपसा मार्ग से लगी है। इसकी पुष्टि संबंधित लेखपाल ने की है। उसी सर्किल रेट से मुआवजा मिले। कागज और धन मिले बिना काम नहीं करने देंगे। तहसीलदार ने किसानों को शुक्रवार को कागज देने का भरोसा दिलाया। किसानों ने कागज और धन मिलने के बाद ही काम करने देने की बात कही।

तीन वर्ष में पूरा करना है लक्ष्य

बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 फरवरी 2020 को चित्रकूट में रखी थी। 15,000 करोड़ की लागत से बनने जा रहे 296 किमी लंबे इस एक्सप्रेस-वे में चार रेलवे ओवरब्रिज, 14 बड़े पुल, 268 छोटे पुल, 18 फ्लाईओवर, 214 अंडरपास व सात रैंप प्लाजा बनने हैं। इसे रिकार्ड तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है।

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