संवाद सूत्र, कबरई (महोबा) : शासन ने लॉकडाउन-3 में ही बुंदेलखंड के खनन उद्योग को अतिआवश्यक सेवा में रख कर काम शुरू करने का आदेश दिया था। इससे पहले क्रशर संचालन के कुशल कारीगर अपने अपने घरों को रवाना हो गए थे। एकलौता स्थानीय क्रशर उद्योग अब रफ्तार पकड़ने के लिए झारखंड के बैजनाथ और उड़ीसा के रईस जैसे तकनीकी जानकारों की राह देख रहा है।

क्रशर एवं खनन उद्योग को चलाने की अनुमति के बाद भी ग्रिट उद्योग प्रवासी आपरेटरों, ब्लास्टर, टेक्नीशियन, फोरमैन व प्रशिक्षित मजदूरों के वापसी के इंतजार में गति नही पकड़ पा रहा है। करीब दो हजार करोड़ से भी अधिक लागत वाली बुंदेलखंड की सबसे बड़ी पत्थर मंडी खनिज नीतियों के चलते वर्ष 2019 बेपटरी हुई और कारोबार डांवाडोल हुआ। शासन ने 20 अप्रैल से उद्योग को चलाने की अनुमति दी। यहां के खनन व क्रशर उद्योग में अन्य राज्यों व जनपदों के 5000 से अधिक प्रशिक्षित श्रमिकों की जरूरत पड़ती है। लगातार लॉकडाउन-4 होने से ऐसे श्रमिकों का आना संभव नही हो पा रहा है। झारखंड के बैजनाथ दक्ष एक्सवेटर ऑपरेटर हैं, वहीं उड़ीसा के रईस हाइड्रा ऑपरेट करते हैं, पश्चिम बंगाल के दिव्य ज्योति मुखर्जी क्रशर प्लांट के इंजीनियर हैं। ये सब परिवहन खुलने के इंतजार में यहां आने की बाट जोह रहे हैं। खनन कार्य मे प्रशिक्षित अन्य श्रमिक भी मध्यप्रदेश, बिहार जैसे प्रांतों व उत्तर प्रदेश के बलिया, गोरखपुर, जैसे जिलों से भी यहां नही पहुंच पा रहे हैं। क्रशर व्यवसाई रामकिशोर सिंह बताते है कि जनपद में भी अब सभी प्रकार के प्रशिक्षित मजदूर मिलने लगे है जिससे खनन कार्य 40 फीसद तक चलने लगा है। खनन उद्यमी समाजसेवी राजेन्द्र उर्फ रज्जन शिवहरे ने कहा कि यदि शासन स्तर पर अन्य प्रांतों व जिलों से यहां काम करने वाले श्रमिकों को लाने की विशेष व्यवस्था ेंकर दी जाए तो यहां का उद्योग पूरी तरह चल निकलेगा।

Posted By: Jagran

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