- पड़ोसी जनपद ने हांक दिए अन्ना मवेशी, चरखारी मार्ग अवरुद्ध

-छह घंटे के जाम ने छुड़ाए पसीने, आश्वासन पर माने ग्रामीण

संवाद सहयोगी, राठ : पड़ोसी जनपद महोबा के एक गांव के किसानों ने सैकड़ों की संख्या में अन्ना मवेशियों को क्षेत्र के कैंथी-बदनपुरा गांव में छोड़ दिया। इससे आक्रोशित सैकड़ों किसानों ने चरखारी मार्ग पर जाम लगा दिया। सुबह से लगा जाम दोपहर बाद प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अन्ना मवेशियों की व्यवस्था कराए जाने के आश्वासन पर खुल सका।

अन्ना मवेशियों की चहल कदमी से किसान खासे परेशान हैं। जिससे किसानों को खेत पर ही फसलों की रखवाली के लिए दिन रात जागना पड़ता है। ऐसे में कैंथी बदनपुरा गांव के सैकड़ों किसान एकाएक गांव में आए मवेशियों से खासे परेशान हो उठे। महोबा के चरखारी थाना क्षेत्र के करहारा गांव के लोगों ने दो दिन पहले रात में सैकड़ों अन्ना मवेशियों को गांव की सरहद में हांक दिया। मवेशी गांव में घुसते ही खेतों की ओर रुख कर गए और किसानों द्वारा दिन रात की मेहनत कर उगाई फसल को चट करने लगे। दोनों गांवों के किसानों में पड़ोसी जनपद से आए मवेशियों के कारण खासा गुस्सा पनपने लगा और मंगलवार सुबह 9 बजे गांव के बाहर चरखारी मार्ग पर पत्थर लगाकर जाम लगा दिया। चरखारी रोड पर जाम लगने की सूचना पर इलाकाई पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन किसानों ने एक नही सुनी। जाम की सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को मिली, दोपहर बाद तकरीबन 3 बजे एसडीएम सुरेश कुमार, सीओ अभिषेक यादव, तहसीलदार रामानुज शुक्ला मौके पर पहुंचे और किसानों को अन्ना मवेशियों की व्यवस्था करने की बात कही। एसडीएम सुरेश कुमार ने बताया कि कुछ मवेशी बाहरी जनपद से आए हैं। बाकी मवेशी गांव के ही किसानों के थे। उन्हें आश्वासन दिया है और मवेशियों की व्यवस्था की पहल की जाएगी। आश्वासन पर तकरीबन 6 घंटे बाद जाम खुल सका। इस दौरान वाहनों की लम्बी कतार लगी रही।

विभिन्न मार्गो पर मवेशियों का कब्जा

कस्बे के चरखारी रोड, महोबा मार्ग, उरई रोड, अम्बेडकर चौराहा, बारा खम्भा सहित कस्बे के विभिन्न मार्गो पर अन्ना मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। रात में लोगों को मवेशियों से खासी परेशानियां होती है। सोमवार देर शाम चरखारी मार्ग पर बाइक सवार अंधेरे में मवेशी से टकरा गए। जिससे बुरी तरह से घायल हो गए है। इसी तरह तिपहिया वाहन से सड़क किनारे घुस गया। गनीमत यह रही कि वह एक दीवार के सहारे टिक गया।

बीएनवी कालेज नहीं बन सका शरणस्थली : गत दिसम्बर में बीएनवी कालेज के प्रबंधक डा. उमाकांत राजपूत ने प्रयास कर क्षेत्र की 6 हजार मवेशियों को शरणस्थली बीएनवी का मैदान बनाया था। जहां पर कुछ दिनों तक मवेशियों की खाने पीने का बंदोबस्त किया गया। लेकिन सरकार द्वारा कोई सहायता ने दिए जाने तथा प्रशासन की सख्ती से कालेज का मैदान मवेशियों की शरण स्थल नहीं बन सका। क्षेत्र के तमाम गांवों से मवेशियों को लाकर यहां रखा गया था।

Posted By: Jagran