संवाद सहयोगी, मौदहा : मुहर्रम के ताजियों, ढालों तथा नेजों के बनाने का कार्य अंतिम चरण में है। इमामबाड़ों की सफाई व रंगाई के साथ जगह जगह मातमी मजलिसों का आयोजन भी शुरू हो जाएगा। स्थानीय सिचौली में कांच का प्रसिद्ध ताजिया अमेरिकन डायमंड व जरी का कार्य माहिर कारीगर अंजाम दे रहे हैं।

सिचौली के इमामबाड़े में इस क्षेत्र का प्रसिद्ध कांच का ताजिया इरफान भाई के नेतृत्व में कारीगर इंजमामुल, रसूल खां, इरफान शाह, आदिल, बाबू खान, लाइट सज्जा के कारीगर बबलू आदि बीते दो माह से बनाने में जुटे हैं। कारीगर इंजमामुल ने बताया कि वह इस ताजिये के लिए कांच व अमेरिकन डायमंड सहित अन्य सामग्री दिल्ली, मुम्बई, हैदराबाद व बेंगलुरु आदि स्थानों से खासी मशक्कत कर मंगाया जाता है। जिसे कारीगर रात दिन क¨टग करने, कांच को जोड़ने व उसके अंदर बारीक बेल बूटों व जालियों के काम को अन्जाम देते हैं। मुहर्रम की नवी रात तक इस ताजिये को पूरी तरह से तैयार कर इमामबाड़े में रख दिया जाएगा। कस्बे में मुहर्रम की पांच (16 सितम्बर) से आलम व सातवीं मुहर्रम को पलंग के जुलूस के साथ आठ मुहर्रम को बुराक का ताजिया निकाला जाएगा। वहीं नौ मुहर्रम को कस्बे के दो स्थानों व रागौल सहित तीन स्थानों में आग के अलाव होंगे। वहीं इसी रात ताजिये निकलना शुरू हो जाएंगे।

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