संवाद सूत्र, अजनर (महोबा) : ग्रामीण पाइप लाइन पेयजल योजना के तहत बनवाई गई टंकी सफेद हाथी साबित हो रही है। क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति ध्यान में रखे बिना बनी टंकी से कभी पूरे गांव में पानी पहुंचा ही नहीं। जहां पानी की सप्लाई हो भी रही थी बीते दस दिनों से मोटर खराब होने से आपूर्ति बुरी तरह बाधित है और लोगों को पीने के लिए दूर से पानी भर कर लाना पड़ रहा है।

लगभग दस हजार से अधिक की आबादी व 15 वार्डों वाली ग्रामसभा में पांच वर्ष पूर्व पेयजल आपूर्ति के लिए ग्रामीण पाइप पेयजल योजना बनाई गई। करोड़ों की लागत से ओवर हेड टैंक का निर्माण कर टंकी भरने के लिए दो बोर कर मोटर लगाई गईं। आपूर्ति के लिए पाइप लाइन बिछाते समय गांव की भौगोलिक स्थिति नजरंदाज करने का परिणाम यह निकला कि आधे गांव में तो पानी की आपूर्ति हुई और आधा गांव ऊंचाई पर होने से वहां पानी ही नहीं पहुंचा। बीते दस दिनों से दोनों मोटरें खराब होने से सर्दी में भी लोग पेयजल के लिए परेशान हैं और दूर से पानी भर कर लाने को मजबूर हैं। अधिकांश कनेक्शन धारकों के कनेक्शन में फ्लूड कंट्रोल नहीं लगाए हैं। जिससे पानी का प्रेशर डाउन हो जाता है और पानी पूरी तरह आगे नहीं बढ़ पाता है। इस लिए पानी चालू होने पर सभी सबको बराबर नहीं मिल पाता है।

- आलोक नगरिया गांव में टंकी बनने के बाद भी अधिकांश हैंडपंपों का ही सहारा लेना पड़ रहा है। पीने के लिए पानी भरने को सुबह से ही जुटना पड़ता है तब परिवार को पानी मुहैया हो पाता है। दस दिनों से मिलने वाली थोड़ी बहुत आपूर्ति भी बंद पड़ी है।

- करन सिंह पेयजल परियोजना की मोटरों के खराब होने की जानकारी है। पर निगम के पास धन न होने से वहीं नहीं बन पा रही हैं। परियोजना के संचालन के लिए ग्राम सभा द्वारा मोटर ठीक कराने के लिए डीपीआरओ को पत्र भेजा गया है।

- वीएस गौतम, अधिशासी अभियंता जल निगम (विद्युत एवं यांत्रिक)

Posted By: Jagran

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