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UP: यहां रावण को जलाना मना है! रावण की भव्य मूर्ति की सदियों से हो रही पूजा

Published: Sun, 18 Oct 2026 03:07 PM (IST)

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के बिहुंनी कला गांव में दशहरे पर रावण दहन नहीं किया जाता, बल्कि पौष माह में उसकी भव्य प्रतिमा की पूजा होती है।

गांव में दशहरे के दिन रावण के पुतले का दहन नहीं होता

गांव में दशहरे के दिन रावण के पुतले का दहन नहीं होता

HighLights

  1. हमीरपुर के बिहुंनी कला गांव में रावण दहन नहीं होता।

  2. पौष माह में रावण की विशाल प्रतिमा की पूजा होती है।

  3. यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है।

जागरण संवाददाा, हमीरपुर। दशहरे पर जहां देशभर में रावण का दहन किया जाता है, वहीं हमीरपुर जिले में एक ऐसा गांव भी है, जहां पर दशहरे के दिन सन्नाटा पसरा रहता है। इस गांव में दशहरे के दिन रावण के पुतले का दहन नहीं होता है। यहां पौष माह में आयोजित होने वाले मेले में रावण की प्रतिमा का श्रृंगार कर पूजा की जाती है। जिसमें सैकड़ों की भीड़ उमड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा सैकड़ों वर्ष से चली आ रही है।

हमीरपुर जिले के मुस्करा थाना क्षेत्र के बिहुंनी कला गांव में रावण की विशालकाय प्रतिमा स्थापित है। मेला के समय यहां रावण की प्रतिमा को रंग रोशन करने की तैयारी ग्रामीणों द्वारा शुरू की जाती है। यहां के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि छत्रपाल सिंह ने बताया कि गांव में पौष माह में मेला के समय साल में एक बार रावण की पूजा अर्चना की जाती है।

गांव के लोग बड़े ही श्रद्धाभाव से रावण की पूजा-अर्चना करते हैं। ब्लॉक प्रमुख वीर नारायण राजपूत ने बताया कि हमीरपुर जिले के मुस्करा ब्लॉक के बिहुंनी कला इकलौता ऐसा गांव है, जहां दशहरे पर्व की धूम नहीं रहती है। पूरा गांव एकजुट होकर रावण की प्रतिमा के सामने माथा टेकता है।

जनवरी व फरवरी के समय गांव में विशाल मेला का आयोजन किया जाता है इस समय रावण की प्रतिमा का रंग रोगन कर श्रृंगार किया जाता है और पूजा अर्चना होती है।

दस फीट ऊंची स्थापित है रावण की प्रतिमा

ग्राम प्रधान प्रतिनिधि छत्रपाल राजपूत ने बताया कि बिहुंनी कला गांव में दस फीट ऊंची और बीस हाथ वाली रावण की प्रतिमा स्थापित है। रावण की प्रतिमा के मुकुट में घोड़े जैसी आकृति भी बनी हुई है। इसके बीस हाथ हैं।

रावण की मुख्य सिर के अलावा नौ सिर भी प्रतिमा में लगे हैं। प्रतिमा बैठने की मुद्रा में है। गांव के अनिल कुमार ने बताया कि दशहरे पर्व पर कोई कार्यक्रम नहीं होता है न ही रावण की पूजा होती न उसे सजाया जाता है उनके नाम पर गांव का एक मुहल्ला रावण पटी के नाम से आज भी बसा है।