संवाद सहयोगी, भरुआ सुमेरपुर : बुंदेलखंड का नाम आते ही लोगों के जेहन में पथरीली जमीन बंजर खेत, नदी नालों का उबड़ खाबड़ मंजर याद आने लगता है। इसी उबड़ खाबड़ बुंदेलखंड में बासमती की खुशबू चारों तरफ उड़ रही है। लेकिन विडंबना यह है कि किसानों को उपज बेचने के लिए यहां बाजार उपलब्ध नहीं है और उसे मजबूर होकर औने पौने दामों में रात दिन की कमाई बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।

बुंदेलखंड का किसान दैवीय आपदाओं के साथ साथ अन्ना गोवंश के कहर से बेहद परेशान है। इनसे उबरने के लिए किसानों ले खरीफ में बोई जाने वाली फसलों से विनाश करके धान की फसल उगाने का निर्णय लिया। धान का उत्पादन करने के लिए यहां के किसान ने पंजाब, हरियाणा से आने वाले किसानों से संपर्क किया और उनको एक वर्ष के लिए लीज पर खेत देकर धान उत्पादन के तौर तरीकों को सीखा। इसके बाद किसानों ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। टेढ़ा सहित एक दर्जन गांवों में इस वर्ष 25 हजार बीघे में धान की फसल लहलहा रही है। ज्यादातर किसानों ने धान की प्रजाति बासमती 1121 की फसल तैयार की है। इसकी बाजार में कीमत पंजाब में 3500 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक है लेकिन यहां पर धान का बाजार न होने से यह महज 2500 रुपये क्विंटल ही बिक रहा है। इसको भी पंजाब, हरियाणा से आने वाले व्यापारी खरीद रहे हैं। यहां पर इसका कोई खरीदार नहीं है। टेढ़ा के किसान सौरभ सिंह, रोहित सिंह, आरके सिंह, गोपीश्याम द्विवेदी, राजाबाबू तिवारी, एसएम सिंह, प्रिसू सिंह, रंजन सिंह ने बताया कि चावल की सबसे अच्छी प्रजाति का उत्पादन करके किसानों ने यह साबित कर दिया है। बताया कि अकेले टेढ़ा गांव में 10 हजार बीघे में बासमती चावल का उत्पादन किया गया है। इसके अलावा आसपास के दर्जन गांवों में भी 10 हजार बीघे में धान की फसल रोपित की गई है। किसानों के अनुसार यहां पर धान की मिले नहीं है। वर्ना यह धान चावल में तब्दील होने के बाद 80 से 90 रुपये प्रति किलो खुले बाजार में बिक सकता है।

Posted By: Jagran

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