संवाद सहयोगी, भरुआ सुमेरपुर : बेसहारा अन्ना गोवंश के भूसे चारे के लिए मुहैया कराई गई धनराशि का ऑडिट कराने में ग्राम पंचायतें खरी नहीं उतर सकी। वित्तीय वर्ष 2019-20 में ब्लाक की 47 ग्राम पंचायतों को मुहैया कराई गई 22.83 लाख की धनराशि के खर्च का ब्योरा दो दिन में ऑडिट टीम के सामने महज 8 ग्राम पंचायतों ने उपलब्ध कराया है। ऑडिट टीम ने रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपने की बात कही है।

विकासखंड की 57 में 47 पंचायतों को दोनों वित्तीय वर्ष में 22.83 लाख की धनराशि दी गई है। यहां पर 21 व 22 अक्टूबर को ऑडिट होना था। दो दिन में ऑडिट टीम को महज 8 ग्राम पंचायतों ने आय व्यय का ब्योरा दिया है। इनमें इंगोहटा ग्राम पंचायत ने पिछले वर्ष का ऑडिट नहीं कराया है। ऑडिट टीम के सदस्य राजेश कुमार सहायक लेखा परीक्षाधिकारी ने बताया कि अतरैया, सुरौली बुजुर्ग, पंधरी, इंगोहटा, बिरखेरा, उजनेड़ी, पारा रैपुरा, चंदपुरवा बुजुर्ग के सचिवों ने अपना आय व्यय का ब्योरा दिया है। शेष पंचायतों के सचिव ऑडिट कराने नहीं आए है। इससे साबित होता है कि भूसे के इंतजाम में कुछ न कुछ गड़बड़ किया गया है। बुधवार से कुरारा विकासखंड में ऑडिट होना है। उधर प्रधान संघ के ब्लाक संरक्षक अरुण कुमार सिंह ने कहा कि ग्राम प्रधानों को ऑडिट के नाम पर बेवजह परेशान किया जा रहा है। गत वर्ष का सारा रिकार्ड पशुपालन विभाग को मुहैया करा दिया गया है। अब पशुपालन विभाग रिकार्ड नहीं दे रहा है। इससे ऑडिट में परेशानी हो रही है। वहीं पशुचिकित्साधिकारी डॉ. पंकज सचान ने प्रधान संघ के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि सभी आरोप निराधार है। पंचायतों को प्रत्येक बैठकों में रिकार्ड बनाकर रखने की बात बताई गई थी। साथ ही कहा गया था कि आई हुई धनराशि का ऑडिट जरूर होगा। पर पंचायतों ने किसी बात को गंभीरता से नहीं लिया अब ऑडिट का शिकंजा कसने पर बहानेबाजी कर रहे हैं। कहा कि भूसे की खरीद आदि में धांधली नहीं हुई रिकार्ड न बनाने से दिक्कत आ रही है।

Posted By: Jagran

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