जागरण संवाददाता, हमीरपुर : समर्थन मूल्य पर सरकारी क्रय केंद्रों में गेहूं बेचने वाले किसानों को करीब एक माह बीतने के बाद भी धनराशि खातों में नहीं आई है। गेहूं बेचने को पंजीयन करा टोकन लेने वाले किसान भुगतान की स्थिति को देख अब क्रय केंद्रों में गेहूं बेंचने से पीछे हट रहे है। जिले में 1997 किसानों का 23.21 करोड़ रुपये बकाया है। किसानों को डर सता रहा है कि कहीं उनका रुपया फंस न जाए और जरूरत पर न मिले।

जिले में किसानों का गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदने के लिए 49 सरकारी क्रय केंद्र बनाए गए है। जिनके माध्यम से 66500 एमटी गेहूं खरीदने का लक्ष्य निर्धारित है। इसके सबसे अधिक 38 केंद्र पीसीएफ से संचालित है। खरीद के लिए 15 जून तक का समय निर्धारित किया गया है। मौजूदा में अब तक करीब 30366 एमटी गेहूं की खरीद हो सकी है, जो कि लक्ष्य का 50 प्रतिशत भी नहीं है। वहीं 15 जून के 20 दिन शेष है। ऐसे में खरीद लक्ष्य के करीब पहुंचती नहीं दिखाई दे रही है। वहीं अब तक केंद्रों में गेहूं बेचने वाले कई किसानों को एक माह बीतने के बाद भी धनराशि उनके खाते में नहीं आ रही। ऐसे में करीब 50 प्रतिशत किसानों का भुगतान शेष पड़ा है। जिले के कुल 4731 किसानों ने अपना गेहूं सरकारी केंद्रों में बेचा है। जिनमें से 2780 किसानों को ही 35.24 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। वहीं 1997 किसानों का 23.21 करोड़ रुपये बकाया पड़ा है। सबसे ज्यादा बकाएदारी पीसीएफ पर है। यहां गेहूं बेचने वाले 2986 किसानों में केवल 1577 किसानों का ही भुगतान हुआ है। ऐसे में किसानों में धनराशि न मिलने को लेकर बेचैनी है। गेहूं बेच चुके किसानों की हालत देख टोकन प्राप्त कर चुके किसान भी अब अपना गेहूं केंद्रों में नहीं बेच रहे। मामले में जिला पीसीएफ प्रबंधक शिवपाल सिंह का कहना है कि जैसे ही क्रय केंद्रों से कागजात उनके पास आते है वह धनराशि खाते भेज देते है। थोड़ी बहुत बकाएदारी है जिसे जल्द किसानों के खाते में भेजा जाएगा।

Posted By: Jagran

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