'किसानों का पैसा खाने वाली सपा को लगा शाप, इसलिए जनता ने नकारा'; गोरखपुर में बोले CM योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में आपदा राहत राशि वितरण कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी पर किसानों के पैसे के दुरुपयोग का आरोप लगाया।

सीएम योगी आदित्यनाथ
HighLights
मुख्यमंत्री योगी ने सपा पर किसानों का पैसा खाने का आरोप लगाया।
9 लाख से अधिक किसानों को 493 करोड़ रुपये सीधे मिले।
भाजपा सरकार की पारदर्शिता और किसान हितैषी नीतियों पर जोर दिया।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। किसानों की फसल बर्बाद हो और उनके हिस्से की राहत राशि बिचौलियों तथा भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ जाए, तो इसका हिसाब जनता चुनाव में करती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को गोरखपुर में आपदा राहत राशि वितरण कार्यक्रम के मंच से समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि किसानों का पैसा खाने वालों को उनका शाप लगा है।
उन्होंने 2014 के हुदहुद चक्रवात का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि उस समय केंद्र से भेजे गए 3200 करोड़ रुपये में से किसानों तक केवल 800 करोड़ रुपये ही पहुंचे थे। शेष राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। मुख्यमंत्री ने सपा सरकार के कार्यकाल में किसानों को मिलने वाले मुआवजे पर भी सवाल उठाए और कहा कि तब दो, चार या 15 रुपये तक के मुआवजे मिलते थे।
सीएम योगी का यह बयान केवल आपदा राहत के वितरण तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने इसके जरिये भाजपा सरकार की किसान हितैषी छवि को स्थापित करने और विपक्ष के शासनकाल को भ्रष्टाचार तथा उपेक्षा से जोड़ने की कोशिश की।
फसल क्षति के मुआवजे को सीधे किसानों के खाते में भेजने की व्यवस्था को उन्होंने शासन की पारदर्शिता का प्रमाण बताया। साथ ही मुफ्त बिजली, सिंचाई सुविधाओं, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद और किसान दुर्घटना बीमा का उल्लेख कर यह संदेश दिया कि भाजपा सरकार किसानों को संकट के समय आर्थिक सहायता देने के साथ खेती की लागत कम करने और उनकी आय को सुरक्षा देने की दिशा में भी काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग एक सप्ताह पहले अतिवृष्टि, चक्रवात और बाढ़ से बड़े पैमाने पर फसल, मकान और पशुधन को नुकसान हुआ था। सरकार ने आठ से दस दिन के भीतर राहत पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी करते हुए 9,18,091 किसानों के खातों में लगभग 493 करोड़ रुपये भेजे हैं।
यह राशि आपदा राहत कोष से फसल क्षति के मुआवजे के रूप में दी जा रही है। उन्होंने इसे डिजिटल फसल सर्वे और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) का परिणाम बताते हुए कहा कि अब सरकार से जारी होने वाली राशि सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचती है और बीच में बिचौलियों के लिए सेंधमारी की गुंजाइश नहीं रहती।
योगी ने कहा कि इस वर्ष खरीफ के दौरान अब तक आपदा से प्रभावित किसानों और नागरिकों को करीब एक हजार करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इससे पहले भी ओलावृष्टि, चक्रवात और अन्य आपदाओं से फसल क्षति के लिए 169 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। उनके अनुसार, 1,29,326 किसानों को फसल क्षति के मद में 78 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता पहले ही दी जा चुकी है। जनहानि, पशुहानि और मकान क्षति के मामलों में भी 225.93 करोड़ रुपये की सहायता वितरित की गई है।
2017 से पहले सपा सरकार से परेशान थे किसान: योगी
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2014 के हुदहुद चक्रवात का उल्लेख कर कहा कि उस समय किसानों के लिए भेजी गई राहत राशि का बड़ा हिस्सा उन तक नहीं पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों में किसानों के हक के पैसे का दुरुपयोग हुआ।
सपा सरकार के कार्यकाल की आलोचना करते हुए योगी ने कहा कि 2017 से पहले किसानों को बिजली की उपलब्धता और मुआवजे, दोनों के लिए परेशानी उठानी पड़ती थी।
भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद लघु एवं सीमांत किसानों की कर्जमाफी के तहत 86 लाख किसानों के 36 हजार करोड़ रुपये के कर्ज माफ करने का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे किसान हित में उठाया गया शुरुआती कदम बताया। साथ ही कहा कि अब 16 लाख निजी नलकूपों को मुफ्त बिजली दी जा रही है और प्रदेश में 22 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है।
आपदा राहत के साथ धान खरीद और सुरक्षा तंत्र पर भी फोकस
गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावित किसानों को राहत राशि उपलब्ध कराने के साथ ही प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनहानि होने पर संबंधित परिवार को 24 घंटे के भीतर चार लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जाए।
पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 1.20 लाख रुपये की सहायता अलग से देने की व्यवस्था है। यह राशि फसल क्षति के मुआवजे में शामिल नहीं है। पशुधन की हानि और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के मामलों में भी नियमानुसार सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने बाढ़ से कटान वाले क्षेत्रों में तत्काल बचाव कार्य शुरू करने, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत करने और आवागमन बहाल करने के लिए सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, नगर विकास, आवास विभाग तथा विकास प्राधिकरणों को आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने की बात कही।
24 घंटे में मिलेगा दुर्घटना बीमा योजना का लाभ
उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा से हुए नुकसान की भरपाई और राहत कार्यों के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। कटान रोकने के लिए मनरेगा के माध्यम से भी कार्य कराने की व्यवस्था का उल्लेख किया।
आकाशीय बिजली से होने वाली जनहानि रोकने के लिए शुरुआती चेतावनी प्रणाली और वर्षामापी यंत्रों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मौसम संबंधी चेतावनी मोबाइल संदेशों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाई जा रही है। इसके बावजूद आकाशीय बिजली से दुर्घटना होने पर किसान, पट्टेदार और उनके पात्र परिजनों को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत पांच लाख रुपये की सहायता 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश हैं।
धान खरीद के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जिलों में अतिवृष्टि के कारण क्रय केंद्र शुरू करने में देरी हुई है, वहां 15 अक्टूबर से धान तथा ज्वार, बाजरा और मक्का की खरीद शुरू की जाएगी। उन्होंने किसानों से मंडियों और सरकारी क्रय केंद्रों पर उपज बेचने की अपील करते हुए कहा कि खरीद की कोई निर्धारित सीमा किसानों के लिए बाधा नहीं बनेगी और भुगतान सीधे उनके खातों में भेजा जाएगा।
