गोरखपुर, जेएनएन। जिले के पहले कोरोना संक्रमित 49 वर्षीय बाबूलाल की मंगलवार का मौत हो गई। वह उरुवा के हाटा बुजुर्ग गांव के निवासी थे। उन्होंने कोरोना से तो जंग जीत ली थी, लेकिन ङ्क्षजदगी से हार गए। हार्ट अटैक के चलते उनकी सांसें थम गईं।

26 अप्रैल को संक्रमित हुए थे, 26 मई को ठीक हुए

बाबूलाल 26 अप्रैल को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से अपने गांव आए थे। गांव के बाहर ही एक झोपड़ी में रुक गए। उसी दिन उनकी तबीयत खराब होने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड में भर्ती कराया गया था। उसी दिन रात को उनमें कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी। वह पहले ऐसे मरीज थे, जिन्हें ठीक होने में एक माह लगा। वह 26 मई को डिस्चार्ज हुए थे। उन्हें हार्ट के साथ ही शुगर की बीमारी थी। मंगलवार को हार्ट अटैक होने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन वार्ड में भर्ती कराया गया था।

डॉक्टरों के हौसले देख पस्त हो रहा कोरोना

कोरोना वायरस को लेकर भले ही हालात सामान्य हो रहे हों, लेकिन कोरोना योद्धाओं की चुनौतियां पहले से काफी बढ़ गई हैं। बड़ी संख्या में लोगों के संक्रमित होने से डॉक्टरों को छुट्टियां भी कम ही मिल पा रही हैं। बावजूद इसके उनके हौसले बुलंद हैं। हालात को देख प्रतीत हो रहा है कि कोरोना अब कमजोर पडऩे लगा है, क्योंकि मौतों की संख्या में भारी कमी आई है। अ'छी देखभाल व उचित दवा व इलाज से बुजुर्ग भी स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं। इसका सारा श्रेय डॉक्टरों को जाता है। मौत भी उन्हीं मरीजों की हुई, जिन्हें पहले से कोई हार्ट, किडनी या मधुमेह की गंभीर बीमारी थी। 

हमारी जिम्मेदारी बड़ी है

डॉ .राजकिशोर सिंह मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड के नोडल अधिकारी हैं। वह शुरू से जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। 25 जून से नौ जुलाई तक उनकी ड्यूटी कोरोना वार्ड में मरीजों की देखभाल के लिए लगाई गई है। इस दौरान वह घर नहीं जा रहे हैं। परिवार व बच्‍चों से कभी मोबाइल या वीडियो कालिंग से बात हो जाती है। कहते हैं कि इस समय हमारी जिम्मेदारी बड़ी है। परिवार से भी बड़ा दायित्व मिला है। मरीजों का इलाज ही नहीं, उनका हौसला भी बढ़ाना है, नहीं तो 14 दिन वार्ड में रहना उनका मुश्किल हो जाएगा। अपनी ड्यूटी से वह बहुत खुश हैं।

यह परीक्षा का समय

डॉ. अजय यादव मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी के न्यूरो मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष हैं। शुरुआत में उनकी ड्यूटी फ्लू कार्नर ओपीडी में थी। उसी दौरान दो अप्रैल को उनकी पत्नी को जुड़वा ब'चे पैदा हुए। लॉकडाउन शुरू हो गया था, इसलिए परिवार का कोई सदस्य गोरखपुर नहीं पहुंच पाया। खुद सुपर स्पेशलिटी के फ्लू कार्नर ओपीडी में मरीजों की जांच व इलाज कर रहे थे और पूरी सतर्कता के साथ शाम को घर जाते थे। पत्नी व ब'चों से दूर रहते थे। अब कोरोना वार्ड में उनकी ड्यूटी नौ से 22 जुलाई तक लगाई गई है। कहते हैं कि यह हमारी परीक्षा का समय है।

परिवार से बड़ा है समाज के प्रति दायित्व

मेडिकल कॉलेज के कोरोना सेल, सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.गगन गुप्ता ने मार्च से ही कोई अवकाश नहीं लिया है। वह लगातार ड्यूटी कर रहे हैं। मरीजों से लेकर डॉक्टर व कर्मचारियों तक की समस्याओं का समाधान उनकी जिम्मेदारी है। शुरुआत के दिनों में घर जाना बहुत मुश्किल था। अब चीजें व्यवस्थित हो जाने से रात नौ बजे के बाद घर चले जाते हैं। घर में प्रवेश से पहले कपड़े उतारकर गर्म पानी में डाल देते हैं। गर्म पानी से स्नान के बाद घर में जाते हैं, फिर भी परिवार से दूरी बनाए रखते हैं। कहते हैं कि परिवार से बड़ा हमारा समाज के प्रति दायित्व है।

हर हाल में हारेगा कोरोना

डॉ.बीके सुमन जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन हैं। उनकी ड्यूटी फ्लू कार्नर ओपीडी में है। लॉकडाउन शुरू होने के साथ ही लगातार ओपीडी में आने वाले बुखार व सांस के मरीजों को देख रहे हैं। साथ ही बाहर से आए जो लोग मेडिसिन वार्ड में भर्ती हैं, उनकी देखरेख की जिम्मेदारी भी इन्हीं की है। भर्ती मरीजों में से अभी तक चार कोरोना पॉजिटिव मिल चुके हैं। इन मरीजों का प्राथमिक इलाज करना और उन्हें हौसला देना डॉ.सुमन अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। पूरी सावधानी के साथ घर जाते हैं। रविवार को अवकाश में भी आकर मरीजों की हाल-चाल लेते हैं। कहते हैं कि हमारे हौसले से कोरोना जरूर हारेगा।

Posted By: Pradeep Srivastava

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