गोरखपुर : कुशीनगर जिला अस्पताल में इलाज के बाद आठ अ‌र्द्धविक्षिप्त महिलाओं को पुन: कसया वृद्धाश्रम में शिफ्ट कर दिया गया। मेडिकल कालेज द्वारा इनका इलाज किए जाने से इंकार करने के बाद गंभीर रूप से बीमार 14 महिलाओं को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। देवरिया से आईं लावारिश यह अ‌र्द्धविक्षिप्त महिलाएं जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के गले की फांस बन गई हैं। देवरिया के मां ¨वध्यवासिनी बाल गृह सेवा संस्थान में बच्चियों के साथ यौन शोषण का मामला उजागर होने के बाद शासन के निर्देश पर 22 महिला व दो पुरूषों को कसया के वृद्धाश्रम में लाया गया था। पुरुष तो सामान्य हैं पर सभी महिलाएं अ‌र्द्धविक्षिप्त हैं। इन लावारिश अ‌र्द्धविक्षिप्त महिलाओं को न यहां रखने की मुकम्मल व्यवस्था है न इलाज का कोई प्रबंध। लगभग सभी महिलाएं बीमार हैं। सीएमओ डा. हरीचरण ¨सह द्वारा गठित तीन सदस्यीय चिकित्सा टीम ने इनकी चिकित्सकीय परीक्षण करने के बाद गोरखपुर मेडिकल कालेज इलाज के लिए भेजा था। मेडिकल कालेज ने इलाज करने से साफ इंकार कर इन्हें बैरंग वापस भेज दिया। फिलहाल सीएमओ के निर्देश पर सीएचसी कसया के दो चिकित्सक प्रति दिन वृद्धाश्रम जाकर इनकी निगरानी कर रहे हैं। अन्यत्र शिफ्ट करने के लिए लखनऊ डेरा डाले हैं प्रबंधक

शासन के निर्देश पर देवरिया से कसया लाई गईं महिलाएं वृद्धाश्रम संचालक के लिए समस्या बनी हुई हैं। यह वृद्धाश्रम 60 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों को आश्रय देने के लिए है। इसकी क्षमता 150 बुजुर्गों को रखने की है। अ‌र्द्धविक्षिप्त अथवा कम उम्र की महिलाओं को यहां रखे जाने का कोई प्रबंध नहीं है, जबकि यहां आईं सभी महिलाएं अ‌र्द्धविक्षिप्त हैं और इनकी उम्र भी साठ वर्ष से कम है। ऐसे में इन्हें यहां रखा जाना प्रबंधतंत्र के लिए समस्या बना हुआ है। इस समस्या से निजात पाने के लिए वृद्धाश्रम के प्रबंधक प्रदीप त्रिवेदी दो दिनों से लखनऊ में डेरा डाले हैं। उनका कहना है कि शासन ने उच्च स्तर पर बातचीत कर इन महिलाओं को उपयुक्त स्थान पर भेजने की व्यवस्था कराई जाएगी। असहज हुए बुजुर्ग, 14 ने पकड़ी घर की डगर

वृद्धाश्रम में महिलाओं के आने से पूर्व जिले के कोने-कोने से आए 89 बुजुर्ग यहां पूरे सकून के साथ रह रहे थे। अ‌र्द्धविक्षिप्त महिलाओं के आने से यहां की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। उनके द्वारा फैलाई जा रही गंदगी से रहना दुश्वार हो गया है। जिन बुजुर्गों के पास इस आश्रम को छोड़ कर कोई अन्य ठिकाना नहीं है वह तो दुश्वारी झेल कर यहीं रह रहे हैं पर 14 बुजुर्गों ने वृद्धाश्रम छोड़ कर घर की डगर पकड़ ली है।

Posted By: Jagran