गोरखपुर, जागरण संवाददाता। किसी भी तनाव की वजह से छात्रों के अध्ययन और शिक्षकों के अध्यापन में बाधा न आने पाए। उनके हर तनाव को तत्काल दूर किया जा सके, इसके लिए मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अपने परिसर में ही वेलनेस सेंटर स्थापित करने जा रहा है। इस कार्य में उसने महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की मदद से करने की योजना बनाई है। दोनों विश्वविद्यालयों के बीच इसे लेकर अनुबंध हुआ है। अनुबंध पत्र पर प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की और से कुलपति प्रो. जेपी पांडेय की मौजूदगी में डीन आफ प्लानिंग रिसोर्स जेनरेशन प्रो. गोविंद पांडेय और आयुष विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. एके सिंह की मौजूदगी कुलसचिव आरबी सिंह ने हस्ताक्षर किया।

अनुबंध पर हस्ताक्षर के बाद प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पांडेय ने बताया कि करियर सहित विभिन्न समस्याओं को लेकर कई बार विश्वविद्यालय के छात्र तनाव महसू करते हैं, जिसकी वजह से उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो जाता है। शिक्षकों के साथ भी कई बार ऐसी समस्या आती है। ऐसे में विद्यार्थियों और शिक्षकों को तनाव से मुक्त करने वाले सुकून भरे स्थान की तलाश होती है। वेलनेस सेंटर उसी जरूरत को पूरा करेगा। तनाव मुक्त करने के लिए जरूरी उपचार भी सेंटर में किया जाएगा।

आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एके सिंह ने बताया कि सेंटर में विद्यार्थियों की शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या का निदान पारंपरिक और प्राकृतिक उपचार के जरिए किया जाएगा। इसके लिए आयुर्वेदिक मालिश, स्पा, जिम, फिटनेस सेंटर, मैग्नेटो थेरैपी, रंग चिकित्सा, एक्यूपंचर जैसे पद्धति इस्तेमाल की जाएगी। ध्यान और योग का इंतजाम भी वेलनेस सेंटर में रहेगा। दोनों विश्वविद्यालय के बीच हुए अनुबंध में फैकेल्टी हस्तांतरण और शोध में सहयोग जैसी शर्तें भी शामिल हैं।

दोनों विश्वविद्यालय एक-दूसरे के विद्यार्थियों के अध्ययन-अध्यापन लिए अपनी प्रयोगशाला और लाइब्रेरी भी उपलब्ध कराएंगे। वेलनेस सेंटर की स्थापना पर होने वाला खर्च प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय वहन करेगा। आयुष विश्वविद्यालय की ओर से समय-समय पर विशेषज्ञों की निश्शुल्क उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

एमएमएमयूटी के विद्यार्थियों ने बताया आयुष विश्वविद्यालय का 'लोगो': आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एके सिंह ने प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति से अनुरोध किया था कि वह अपने विद्यार्थियों के जरिए नवस्थापित विश्वविद्यालय का 'लोगो' बनवा दें। अनुरोध को स्वीकार करते हुए प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की ओर से एक 'लोगो' प्रतियोगिता आयोजित की गई।

विश्वविद्यालय के छात्र क्रिया-कलाप परिषद की ओर से आयोजित प्रतियोगिता में छात्र विनय कुमार प्रजापति पहले और छात्रा किंजल पांडेय दूसरे स्थान पर रहीं। दोनों विजेताओं को आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा मंगलवार को प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सम्मानित किया गया। पुरस्कार स्वरूप विनय को 5000 और किंचल को 2000 रुपये का चेक दिया गया। पुरस्कार प्रदान करने के बाद आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति ने बताया कि विनय कुमार प्रजापति द्वारा बनाए गए 'लोगो' को विश्वविद्यालय के लिए अंगीकृत कर लिया गया है।

Edited By: Pragati Chand