गोरखपुर, प्रभात कुमार पाठक। फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाले शिक्षक एक-एक कर गिरफ्त में आ रहे हैं। हद तो यह है कि एक तो फर्जी हैं दूसरे सीना चौड़ा कर कह रहे हैं कि हम असली हैं। जब कोई रास्ता नहीं बच रहा है, तो यह कहते फिर रहे हैं कि विभाग ने बिना नोटिस बर्खास्त कर दिया। जबकि हकीकत यह है कि विभाग की नोटिस जब उनके दरवाजे पर पहुंच रही है, तो वह उसे लौटा दे रहे हैं। तीन-तीन नोटिस के बाद भी जब एक फर्जी गुरुजी ने जवाब नहीं दिया, तो विभाग ने उन्हें अंतिम नोटिस देकर कार्यालय में पक्ष रखने के लिए बुलाया। एक दिन वह हिम्मत जुटाकर कार्यालय पहुंचे। देखा कि न तो उनके पास असली होने का कोई साक्ष्य है और न ही उनकी दलील सुनने को कोई तैयार। ऐसे में वह उल्टे पांव वहां से भागने लगे, लेकिन पकड़े गए और पुलिस के साथ गए।

गर्मी की छुट्टियों पर कोरोना का साया

इस बार भी गर्मी की छुट्टियों में परिवार के साथ बाहर जाने वाले शिक्षकों-कर्मचारियों की योजना पर पानी फिरने लगा है। कोरोना का संक्रमण इस कदर बढ़ा है कि पिछले साल की तरह इस बार भी घर में ही छुट्टियां बितानी होंगी। कुछ माह पहले तक सभी को उम्मीद थी कि कोरोना का कहर थम गया है और इस बार सब ठीक रहेगा। जैसे-जैसे गर्मी ने तेवर दिखाना शुरू किया, कोरोना का कहर भी तेज होता गया। पहले स्कूल बंद हुए, इसके बाद परीक्षाएं रद हुईं। अब तो पिकनिक व सैर सपाटा पर भी कोरोना का साया पड़ गया है। घर में रहते-रहते बोर हो चुके शिक्षकों-कर्मचारियों को उम्मीद थी कि बच्चों के साथ किसी हिल स्टेशन पर जाएंगे। खूब मौज-मस्ती होगी, लेकिन परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं। ऐसे में फिलहाल उनकी मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है और इस बार भी घर में ही छुट्टियां बीतने वाली हैं।

गुरुजी, परीक्षा होगी या प्रमोट होंगे

कोरोना के कारण ठप पड़ी शैक्षिक गतिविधियों ने एक बार फिर छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों व अभिभावकों की ङ्क्षचता बढ़ा दी है। एक-एक कर रद हो रहीं बोर्ड परीक्षाओं से छात्र भी असमंजस में हैं। यूपी बोर्ड को छोड़ अन्य बोर्ड के हाईस्कूल के छात्रों को तो पता चल गया है कि उन्हें परीक्षा नहीं देनी है, लेकिन सबसे अधिक परेशान इंटर के छात्र हैं। हर दिन कोई न कोई छात्र अपने शिक्षक को फोन कर पूछ रहा है कि गुरुजी परीक्षा होगी या हम भी प्रमोट होंगे? इंटर की स्थिति कब तक स्पष्ट होगी? हाईस्कूल में प्री-बोर्ड परीक्षा में मेरा नंबर अच्छा नहीं था अब क्या होगा? हाईस्कूल में अंक कम हुए तो आगे प्रतियोगी परीक्षाओं में दिक्कत तो नहीं आएगी? इन सवालों का गुरुजी के पास कोई जवाब नहीं है। छात्रों के फोन से परेशान गुरुजी तो अब अपने सगे-संबंधियों का फोन भी उठाने से बचने लगे हैं।

स्कूल खुलते ही को-रोना

लंबे समय बाद स्कूल खुले तो सन्नाटे में पसरे क्लासरूम गुलजार हो गए। स्कूलों में रौनक आ गई। ऐसा लगा कि इस बार कोरोना को लेकर रोना नहीं रहेगा। अभिभावक भी बच्चों के लिए किताबें व ड्रेस खरीद रहे थे, लेकिन उनका यह उत्साह अधिक दिनों तक कायम नहीं रहा। कुछ ही दिन बाद स्कूलों पर कोरोना का ऐसा साया पड़ा कि शैक्षिक गतिविधियां पटरी पर लौटने की बजाय फिर से ठप हो गईं। बच्चे अपने-अपने घरों में कैद हो गए और शिक्षक उन्हें पढ़ाने के लिए आनलाइन हो गए। अब तो बच्चों के साथ उनके माता-पिता को भी घर पर उन्हें पढ़ाने के लिए खुद पढ़ाई करनी पढ़ रही है। बड़े बच्चों को तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन छोटे बच्चों को आनलाइन पढ़ाने के लिए उनके साथ अभिभावकों को भी समय देना पड़ रहा है। ऐसे में एक बार कोरोना संक्रमण के कारण उन्हें 'रोनाÓ आ रहा है।

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