राजेश्वर शुक्ला, गोरखपुर। पंचायती राज विभाग के एक अफसर को छपास रोग है। लाख प्रयास के बाद उनकी तस्वीरें मीडिया में नहीं आने से उनकी बेचैनी काफी बढ़ गई थी। पिछले सप्ताह उन्हें गच्चा देकर एक चेले ने अपनी तस्वीर लगवा ली। 'साहब आगबबूला हो गए। चेले को डपट लगाई, कहा कि मेरी भी तस्वीर अखबारों में छपवाओ। चेले ने काफी सोचा-विचारा, फिर साहब को एक योजना समझाई। योजना साहब के मनमाफिक थी। फिर क्या, साहब अगले दिन निकल पड़े गांवों में शौचालय निर्माण की हकीकत जानने। तय पटकथा के अनुरूप मौके पर पहुंचे साहब ने फावड़ा उठा लिया और श्रमिकों को गड्ढा बनाने का गुर सिखाने लगे। इतने में चेले ने आवाज लगाई कि फोटो खींच लिया सर, अब चलिए। अब तो आपका फोटो छपने से कोई रोक नहीं पाएगा। अगले दिन अखबारों में साहब की तस्वीर चौड़े से छपी। साहब ने चेले से कहा, देखो कैसे छपना है हम जानते हैं।

फूलने लगी गुरुजी की सांस

लॉकडाउन के कारण घरों में आराम फरमा रहे गुरुजी की ड्यूटी रेलवे स्टेशन पर क्या लगी, उन्हें दिन में ही तारे दिखने लगे। स्टेशन पर आ रहे हजारों प्रवासी मजदूरों को देख गुरुजी की सांस फूलने लगी। ड्यूटी न करना पड़े, इसके लिए भी तरकीब निकाली जाने लगी। कुछ दिनों तक टालमटोल चलता रहा। इस बीच जिले के एक बड़े अफसर स्टेशन का जायजा लेने पहुंचे, तो अधिकांश गुरुजी ड्यटी से गायब मिले। अफसर ने सख्ती बरतने का निर्देश दिया। आनन-फानन दो दर्जन से अधिक गुरुजी लोगों को प्रशासन की ओर से नोटिस मिल गई। कार्रवाई के डर से गुरुजी स्टेशन पर ड्यूटी करने पहुंचे, तो शुरू हो गया बहानेबाजी का दौर। स्टेशन पर किट आदि की सुविधा नहीं होने का हवाला देकर विरोध-प्रदर्शन का दबाव बनाने लगे। इस पर एक गुरुजी ने बाकी को समझाया कि यह समय अनुकूल नहीं है, ऐसे में काम करने में ही भलाई है।

खिसक लेने में ही भलाई समझी

लॉकडाउन-4 में जिला प्रशासन ने फिजिकल डिस्टेंसिंग की हिदायत देकर कई दुकानों व प्रतिष्ठानों को खोलने का सशर्त आदेश दे दिया। अधिकतर प्रतिष्ठानों को क्रमवार खोलने की अनुमति दी गई। कपड़ा व ज्वेलरी समेत कुछ ऐसे भी प्रतिष्ठान रहे, जिन्हें खोलने की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद कुछ लोग इन दुकानों को खोलने का आदेश देने के लिए जिला प्रशासन पर दबाव बनाने लगे। इनमें कुछ ऐसे भी थे, जिनके पास अपना कोई प्रतिष्ठान नहीं है। तथाकथित रहनुमाओं का दांव उस वक्त उल्टा पड़ गया जब 'अफसर ने उन्हें फटकार लगानी शुरू की। 'अफसरÓ ने कहा कि यहां जनता की जान सांसत में पड़ी है और आप लोगों को नेतागिरी का चस्का लगा है। बताइए आपका क्या नाम है, आपके पास तो कोई दुकान भी नहीं है, फिर क्यों आ गए? माहौल गरम होते देख व्यापारी नेता बैकफुट पर आ गए और वहां से निकल लेने में ही भलाई समझी।

कोरोना भले न मारे, तहरी मार डालेगी

कोरोना का संक्रमण न फैले, इसके लिए प्रवासियों को सीधे गांवों में पहुंचने से रोकने को शासन के निर्देश पर क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए थे। जांच पड़ताल के बाद क्वारंटाइन किए गए लोगों को 14 दिन (एक मई के बाद 21 दिन) इन सेंटरों पर रुकना था। सेंटरों पर क्वारंटाइन प्रवासियों के लिए सुबह-शाम भोजन की व्यवस्था को लेकर तहसील स्तर पर कम्युनिटी किचन भी बनाए गए। यहीं से गांवों में बने क्वारंटाइन सेंटरों पर भोजन भेजा जाना था। अधिकांश क्वारंटाइन सेंटरों में लोग भोजन की मात्रा देख खाने से इन्कार करने लगे। कई इलाकों में सुबह का खाना देर शाम और शाम का खाना देर रात पहुंचने लगा। सुबह चार पूड़ी-सब्जी और शाम को एक दोना तहरी देख गोला के एक सेंटर पर क्वारंटाइन पहलवान ने आखिरकार कह ही दिया कि कोरोना भले न मारे, लेकिन यह पूड़ी और तहरी जरूर मार डालेगी। यह खाना हमें कुपोषित बना देगा।

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दो निजी अस्पतालों को मिली कोरोना संक्रमितों के इलाज की अनुमति Gorakhpur News

गोरखपुर, जेएनएन। मानक पर खरे उतरने वाले शहर के दो निजी अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना संक्रमितों के इलाज की अनुमित दे दी है। सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि पैनेसिया और शाही ग्लोबल हॉस्पिटल को अनुमति प्रदान की गई है। निजी अस्पतालों में इलाज कराने वालों का खर्च स्वयं वहन करना होगा।

25 डेंटल क्लीनिकों को मिली इमरजेंसी सेवा की अनुमति

स्वास्थ्य विभाग ने शहर के 25 डेंटल क्लीनिकों को भी इमरजेंसी सेवा की अनुमति प्रदान कर दी है। यह सुविधा 31 मई तक के लिए दी गई है। सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि क्लीनिकों को कोविड-19 के नियमों का पालन हर हाल में करना होगा। नहीं करने पर अनुमति निरस्त कर दी जाएगी। इस संबंध में सभी निजी अस्‍पतालों के संचालकों को बता दिया गया है। अस्‍पताल संचालकों से लिखित भी ले ली गई है। सभी को नियमों का पालन करना ही होगा।

ट्रांसपोर्ट नगर का एक निजी अस्पताल सील

ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती पिपरौली के टोटहा, भौवापार की महिला में कोरोना संक्रमण की पुष्टि के बाद अस्पताल को सील कर सैनिटाइज कराया गया। महिला को बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड में शिफ्ट करा दिया गया है। महिला की ब'चेदानी में रक्तस्राव हो रहा था। परिजनों ने निजी अस्पताल में भर्ती कराया।

मुंबई से दो माह पहले आई है महिला

अभी दो माह पहले वह महिला मुंबई से लौटी है। इसलिए एहतियातन अस्पताल प्रबंधन ने महिला को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर उनका नमूना जांच के लिए निजी पैथोलॉजी को भेजा था। रविवार को रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई तो हड़कंप मच गया।

अस्पताल को कराया सैनिटाइज

सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि अस्पताल को सैनिटाइज कराकर एक दिन के लिए सील कर दिया गया है। वहां भर्ती एक दूसरी महिला को सरकारी अस्पताल में शिफ्ट कराया गया है। मरीज को देखने वाले डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों को होम क्वारंटाइन की सलाह दी गई है। 

Posted By: Satish Shukla

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