डॉ. राकेश राय, गोरखपुर। कोरोना ने न केवल जिंदगी की रफ्तार को थाम लिया है, बल्कि जिले की पहचान तक बदल दी है। अब तो जिले के साथ यह भी बताने की जरूरत पड़ रही कि उसका जोन सिंबल क्या है? ग्रीन, ऑरेंज या फिर रेड। मजे की बात यह है कि मरीजों की संख्या बढऩे के कारण चंद घंटे भी नहीं लग रहे इस पहचान को बदलने में। जोन सिंबल के आधार पर ही सरकार की ओर से लॉकडाउन में छूट का निर्धारण किया गया है। इसको लेकर जोन की पहचान के सहारे भी कोरोना से सतर्कता के लिए जुमले गढ़े जाने लगे हैं। बीते दिनों कुछ लोग चर्चा करते नजर आए कि ग्रीन जोन में अधिक छूट पर लोगों को इतराने की जरूरत नहीं है। ऐसा न हो कि छूट के चक्कर में सड़क पर भीड़ बढ़े और तरबूज वाला हाल हो जाए, ऊपर से हरा और फटे तो लाल हो जाए।

भूखे जरूर हैं पर भिखारी नहीं

दो हाथ हैं, दो पैर है और जज्बे में खुद्दारी है। आज मजबूर बैठे हैं, क्योंकि फिजा में बीमारी है। हाथ में पैकेट थमाने से पहले तस्वीर खींच लेते हो, दो रोटी के एवज में इज्जत छीन लेते हो। हम भूखे जरूर हैं पर भिखारी नहीं, सहयोग करें मगर शर्मिंदा नहीं। सोशल मीडिया पर इन दिनों वायरल यह पोस्ट दरअसल उन लोगों को शर्मिंदा कर रही है, जो जरूरतमंदों को मदद करने से पहले अपनी मार्केटिंग में जुट जाते हैं। मदद के भोजन का निवाला भूखे के मुंह तक पहुंचने से पहले सोशल मीडिया पर मदद का ढिंढोरा पीट देते हैं। यह भी नहीं सोचते कि उनकी सस्ती लोकप्रियता की इस ख्वाहिश से उन जरूरतमंदों पर क्या गुजरती है, जो महज लॉकडाउन की वजह से बेकार हैं, वरना उनमें भी खुद को साबित करने की रफ्तार है। इसलिए हे मददगारों! मदद करो पर मजबूर लोगों की इज्जत से खिलवाड़ नहीं।

फिजिकल डिस्टेंसिंग पर भारी नेताजी की शान

फूल वाली पार्टी के एक स्थानीय नेताजी बीते दिनों इसलिए नाराज हो गए कि उनके साथियों ने फिजिकल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के फेर में उनकी शान में गुस्ताखी कर दी। यह नाराजगी उन्होंने दिल में ही नहीं रखी बल्कि उसे सोशल मीडिया पर भी साझा कर दिया और अपनी किरकिरी करा बैठे। हुआ यूं कि पार्टी के मंडल स्तरीय नेताओं ने एक वार्ड में कोरोना योद्धाओं के सम्मान के लिए कार्यक्रम आयोजित किया। फिजिकल डिस्टेंसिंग बनी रहे, इसके लिए कार्यक्रम में मात्र तीन-चार नेताओं को ही शामिल किया गया। कोरोना से बचाव के चक्कर में वार्ड में रहने वाले यह नेताजी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके, जिन्हें इस बात का गुमान था कि उनकी मौजूदगी के बिना उस इलाके में कोई कार्यक्रम हो ही नहीं सकता। ऐसे में वह इस कदर नाराज हो गए कि पार्टी नेतृत्व की ओर से मिली फिजिकल डिस्टिेंसिंग की नसीहत को भी भुला बैठे।

खाना भेजते हो या मिलाऊं 100 नंबर

लॉकडाउन में लोगों की मदद के लिए प्रशासन की ओर बनाए गए हेल्प डेस्क पर बैठे एक अफसर को पिछले दिनों एक महिला ने मदद में देर करने के नाम पर पुलिस बुलाने की धमकी दे डाली। हुआ यूं कि जब महिला ने मदद के लिए डेस्क पर फोन मिलाया, तो अफसर ने कागज का पेट भरने के लिए उससे पूछताछ शुरू कर दी। प्राथमिक पूछताछ में उसने खुद को आर्केस्ट्रा में काम करने वाली कलाकार बताया। जब सवालों का सिलसिला बढऩे लगा तो उसका धैर्य जवाब दे गया। सवाल के अंदाज में वह बोली, जल्द खाना भेजते हो या लगाऊं 100 नंबर पर फोन। सुनकर एकबारगी तो प्रशासनिक अफसर सकते में आ गए, लेकिन जब बात समझ में आई, तो काफी देर तक वहां इसे लेकर हंसी-मजाक का माहौल रहा। आनंद लेने के लिए कई लोग अफसर से महिला के धमकी वाले अंदाज में वही सवाल दिनभर पूछते रहे। 

Posted By: Satish Shukla

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