गोरखपुर, जागरण संवाददाता। खाद्य पदार्थों के साथ-साथ अब कपड़ा पहनना भी महंगा होगा। केंद्र सरकार ने कपड़े पर जीएसटी पांच से बढ़ाकर 12 फीसद कर दी है। जिससे सिंथेटिक, सूती के साथ-साथ ऊनी कपड़े महंगे भी हो जाएंगे। बढ़ी हुई नई दरें जनवरी से लागू होंगी। जिसके बाद कपड़ा प्रति मीटर सात रुपये तक महंगा हो जाएगा। इसके साथ ही निर्यात लागत भी बढ़ेगी। कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि पहले कोरोना ने मारा, अब 12 फीसद टैक्स होने से उनका कारोबार पूरी तरह से चौपट हो जाएगा।

सरकार को इस समय व्यापारियों की मदद करनी चाहिए थी, उल्टा टैक्स बढ़ा दिया गया। इससे न सिर्फ आम आदमी पर महंगाई की मार पड़ेगी बल्कि छोटे व्यापारी भी प्रभावित होंगे। धोती, कुर्ता व कमीज आदि का कपड़ा महंगा हो जाएगा। अन्य कपड़ों में भी बढा़ेतरी होगी। सारा कारोबार बड़े व्यापारियों के हाथ में चला जाएगा। सरकार को व्यापारी हित में फिलहाल जीएसएटी पांच फीसद ही रखना उचित होता।

जीएसटी 12 फीसद लगने से पकड़े की कीमत में प्रति मीटर सात फीसद तक की बढ़ोतरी हो जाएगी। इससे दो नंबर के व्यापार को और बढ़ावा मिलेगा। सरकार से हमारी मांग है कि अभी कम से कम दो साल तक कोई टैक्स न लगाएं। - राजेश नेभानी, अध्यक्ष, चेंबर आफ टेक्सटाइल्स।

कपड़े पर जीएसटी बढ़ने से आम आदमी के ऊपर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इससे खासकर छोटे व्यापारी अधिक प्रभावित होंगे और सारा व्यापार बड़े व्यापारियों के हाथ में चला जाएगा। - संजय अग्रवाल, महामंत्री, चेंबर आफ टेक्सटाइल्स।

अभी कपड़ा व्यापारी करोनाकाल से ऊबरे हैं। ऐसे में सरकार को हम व्यापारियों का सहयोग करना चाहिए। कपड़ा महंगा होगा तो इसका सीधा असर हमारे व्यवसाय पर पड़ेगा। - मनीष सराफ, थोक कपड़ा व्यवसायी

सिंथेटिक व सूती कपड़ा महंगा होगा। इसका सीधा असर पहले से महंगाई झेल रहे आम आदमी पर पड़ेगा। सरकार को कपड़े पर पांच फीसद से जीएसटी नहीं लगाना चाहिए। - अनूप गोयल, थोक कपड़ा व्यवसायी।

Edited By: Pradeep Srivastava