गोरखपुर, जेएनएन। कुशीनगर जिले के अंतिम छोर नारायणी नदी और बाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व के दियारा क्षेत्र में बसे गांवों के दिन बहुरेंगे। कभी ये गांव जंगल दस्युओं की शरण स्थली हुआ करते थे। दुखद स्थिति यह है बिक आतंक से मुक्त होने के बाद भी यह गांव विकास की मुख्य धारा से नहीं जुड़ सके। अब इस ओर सरकार  की नजर गई है। प्रकृति की गोद में बसे इस इलाके को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने को कदम बढ़ाया गया है।

कभी यहां था डाकुओं का आतंक

दियारा क्षेत्र के हरिहरपुर, शिवपुर, मरिचहवां, नरायनपुर आदि गांवों में डाकुओं का आतंक बसता था। मरिचहवां नरसंहार कांड ने प्रदेश सरकार तक को हिला कर रख दिया था। 30 मार्च 1989 को डाकुओं के एक गिरोह ने 13 ग्रामीणों को इस गांव में लाइन से खड़ा कर गोलियों से भून डाला था। अब इस क्षेत्र के पर्यटन विकास के मद्देनजर महानिदेशक पर्यटन रवि कुमार एनजी ने क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी से स्थलीय निरीक्षण कर प्रस्ताव मांगा है। यहां पर्यटकों के ठहराव की व्यवस्था होगी। बड़ी गंडक का पनियहवा घाट चमकेगा तो बुलहवां के प्राचीन पथलेश्वर नाथ मंदिर का कायाकल्प कर पर्यटकों को आकर्षित किया जाएगा।

विधायक ने की थी पहल

खड्डा के विधायक जटाशंकर त्रिपाठी ने शासन को पत्र भेज पर्यटन विकास की मांग की थी। इसका संज्ञान लेते हुए क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी से प्रस्ताव मांगा गया है। 19 फरवरी 2020 को भेजे गए पत्र में निर्देशित किया गया है कि नारायणी उस पार बसे गांवों का स्थलीय निरीक्षण कर दो पार्ट में प्रस्ताव तैयार किया जाए। एक पार्ट में ऐसे कार्यों को रखा जाए, जिन्हें प्रदेश सरकार के रूरल टूरिज्म स्कीम के तहत अधिकतम सीमा में वित्तपोषित किया जा सके। दूसरा पार्ट भारत सरकार के रूरल टूरिज्म स्कीम के अधिकतम सीमा के अनुरूप हो, ताकि वित्तीय स्वीकृति में दिक्कत न आए।

जल्‍द होगा स्‍थलीय निरीक्षण

इस संबंध में क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रवींद्र मिश्र का कहना है कि पत्र प्राप्त हो गया है। शीघ्र ही स्थलीय निरीक्षण कर निर्देश के मुताबिक प्रस्ताव तैयार कर भेजा जाएगा।

Posted By: Satish Shukla

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