गोरखपुर में अस्पताल की लैब में दिखे दो विषैले सांप, एक का हुआ रेस्क्यू और दूसरे की तलाश जारी
गोरखपुर के कैंपियरगंज स्थित जय अंबे हॉस्पिटल की लैब में दो विषैले सर्प मिलने से हड़कंप मच गया। एक बड़े सर्प को रेस्क्यू टीम ने पकड़ लिया।
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अस्पताल की लैब में दिखे दो विषैले सांप।
HighLights
जय अंबे हॉस्पिटल लैब में दो विषैले सर्प दिखे।
रेस्क्यू टीम ने एक बड़े सर्प को सुरक्षित पकड़ा।
छोटे सर्प की तलाश जारी, सुरक्षा पर सवाल।
संवाद सूत्र, करमैनी घाट (गोरखपुर)। कैंपियरगंज कस्बे में स्थित जय अंबे हॉस्पिटल की लैब में गुरुवार को दो विषैले सर्प दिखाई देने से हड़कंप मच गया। अस्पताल कर्मियों के अनुसार लैब में एक बड़ा और एक छोटा सर्प दिखाई दिया।
सूचना मिलने पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने काफी मशक्कत के बाद बड़े सर्प को सुरक्षित पकड़ लिया, लेकिन छोटे सर्प की काफी देर तक तलाश करने के बावजूद उसका पता नहीं चल सका। इसके बाद अस्पताल परिसर में छोटे सर्प के मौजूद होने की आशंका को लेकर मरीजों, तीमारदारों और कर्मचारियों में चिंता बनी रही।
सर्प का रेस्क्यू करने वाले कमलेश मौर्य के अनुसार पानी के पाइप के रास्ते सर्प के अस्पताल के अंदर पहुंचने की आशंका है। उन्होंने बताया कि संभव है कि चूहों का पीछा करते हुए सर्प पाइप के जरिए लैब तक पहुंचा हो। हालांकि छोटे सर्प के अस्पताल में पहुंचने के वास्तविक रास्ते की पुष्टि नहीं हो सकी है।
लैब में सर्प मिलने से सुरक्षा पर सवाल
मुख्य कस्बे में स्थित अस्पताल की लैब में एक साथ दो विषैले सर्प दिखाई देने की घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा और साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल परिसर में झाड़ियों, नालियों और पाइप के आसपास नियमित सफाई कराई जानी चाहिए। साथ ही सर्पों के प्रवेश के संभावित रास्तों को चिन्हित कर उन्हें बंद कराने की जरूरत है।
छोटे सर्प की तलाश से बनी चिंता
बड़े सर्प के पकड़े जाने के बाद भी छोटे सर्प का पता नहीं चलने से अस्पताल में आने वाले लोगों की चिंता दूर नहीं हुई है। लोगों ने अस्पताल प्रबंधन से पूरे परिसर, विशेषकर लैब, नालियों, पाइपलाइन और आसपास के हिस्सों की गहन जांच कराने की मांग की है।
मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए आवश्यक सावधानी बरतने और छोटे सर्प की तलाश पूरी कराने की भी मांग की गई है। अस्पताल परिसर में सर्प मिलने की घटना के बाद अब छोटे सर्प की तलाश और उसके प्रवेश के रास्ते को बंद करना सबसे अहम चुनौती बनी हुई है।
