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यूपी में निजी वाहन मालिकों को बड़ी राहत, परिवहन विभाग ने फिटनेस टेस्ट का बदला नियम

Published: Wed, 16 Sep 2026 11:39 PM (IST)

उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने 6 से 9 सीट क्षमता वाले निजी वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र की अनिवार्यता समाप्त कर दी है।

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HighLights

  1. 6-9 सीट क्षमता वाले निजी वाहनों को फिटनेस से छूट।

  2. गोरखपुर के 5849 वाहन मालिकों को मिली बड़ी राहत।

  3. परिवहन विभाग ने 2005 के पुराने आदेश को रद्द किया।

प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। छह से नौ सीट क्षमता वाले निजी वाहन के मालिकों को फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं बनवाना पड़ेगा। उत्तर प्रदेश में फिटनेस प्रमाणपत्र बनवाने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। परिवहन विभाग ने चालक को छोड़कर छह से अधिक और अधिकतम नौ सीट क्षमता वाले निजी वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र अनिवार्य किए जाने संबंधी 12 दिसंबर, 2005 के पुराने आदेश को निरस्त कर दिया है।

परिवहन आयुक्त (टीसी) आशुतोष निरंजन की ओर से 15 सितंबर, 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब केवल वाहन की सीट क्षमता के आधार पर निजी गैर परिवहन वाहन के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र हासिल करने की बाध्यता नहीं होगी।

गोरखपुर परिवहन विभाग (आरटीओ) में पंजीकृत 5849 वाहन मालिकों को नई व्यवस्था का लाभ मिलेगा। उन्हें प्रत्येक दो या एक साल पर अब वाहन के फिटनेस प्रमाणपत्र के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।

फिटनेस प्रमाणपत्र लेने की बाध्यता नहीं

पूर्व आदेश के मुताबिक, छह से नौ सीट क्षमता वाले निजी वाहनों का भी फिटनेस प्रमाण पत्र बनवाना अनिवार्य था। नए वाहन की खरीद के बाद आठ वर्ष तक प्रत्येक दो साल पर फिटनेस जांच करानी होती थी। आठ वर्ष के बाद यह प्रक्रिया प्रत्येक वर्ष पूरी करनी होती थी।

परिवहन आयुक्त का कहना है कि पूर्व के दिशा-निर्देशों के क्रम में पंजीकृत निजी गैर परिवहन वाहनों से केवल उनकी सीट क्षमता के कारण फिटनेस प्रमाणपत्र लेने की बाध्यता नहीं होगी। इसका यह अर्थ नहीं है कि ऐसे वाहनों पर सभी कानूनी और सुरक्षा संबंधी नियम खत्म हो गए हैं।

टीसी ने साफ किया है कि मोटर यान अधिनियम, 1988, केंद्रीय मोटर यान नियमावली, 1989 और अन्य लागू कानूनी प्रविधानों के तहत वाहन मालिकों के अन्य सभी दायित्व एवं सुरक्षा नियम पूर्व की तरह प्रभावी रहेंगे।

भविष्य में फिर बदल सकता है नियम

भारत सरकार से इस विषय में स्पष्ट वैधानिक स्थिति या मार्गदर्शन मिलने अथवा सक्षम स्तर पर नई वैधानिक या प्रशासनिक व्यवस्था तय होने तक यह व्यवस्था प्रभावी रहेगी। भविष्य में केंद्र सरकार या सक्षम प्राधिकारी की ओर से कोई नया निर्देश जारी होने पर उसके अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेश के सभी पंजीयन प्राधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे 12 दिसंबर, 2005 के आदेश के निरस्तीकरण के बाद केवल सीट क्षमता के आधार पर निजी गैर परिवहन वाहनों से फिटनेस प्रमाणपत्र की मांग न करें।

परिवहन आयुक्त का दिशा-निर्देश प्राप्त हुआ है, जिसका अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा। नई व्यवस्था के अंतर्गत छह से नौ सीट वाले निजी वाहन मालिकों को राहत मिलेगी।

-अरुण कुमार, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, गोरखपुर