गोरखपुर, जेएनएन। लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने के प्रदेश सरकार के फैसले को पूर्व पुलिस अधिकारियों ने सराहना की है। उनका कहना है कि इससे न केवल पुलिस की कार्य कुशलता बढ़ेगी, बल्कि कानून-व्यवस्था पर अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से नियंत्रण रखा जा सकेगा। इस प्रणाली लागू होने के बाद पुलिस को मजिस्ट्रीयल पावर मिलने से कई कामों में होने वाली अनावश्यक देरी से बचा जा सकेगा।

पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की मांग काफी दिनों से उठ रही थी। लागू अब हुई है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद पुुलिस की कार्य क्षमता काफी बढ़ जाएगी। पहले कानून-व्यवस्था की कोई समस्या खड़ी होने पर अहम फैसल लेने का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होता था। पुलिस की जिम्मेदारी उसे फैसले को लागू करने तक सीमित रहती थी, लेकिन यह व्यवस्था लागू होने के बाद यह अधिकार पुलिस के पास आ जाएगा। पुलिस अधिकारी स्थिति की नजाकत के हिसाब से फैसले ले सकेंगे और उसके अनुसार आदेश-निर्देश जारी कर सकेंगे। - जेपी सिंह, सेवानिवृत्त पुलिस उप महानिरीक्षक

यह बदलाव काफी सकारात्मक है। पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद पुलिस कार्यप्रणाली में बढ़ा बदलाव आएगा। पहले धारा 144 लागू करने, अपराधियों और आपराधिक गिरोहों पर गुंडा और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करने पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास रहता था, लेकिन अब यह अधिकार सीधे पुलिस को मिल जाएगा। इससे अपराध और अपराधियों को अपेक्षाकृत प्रभावी ढंग से काबू किया जा सकेगा। मजिस्ट्रीयल पावर मिलने से कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी होने पर पुलिस अब अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से निपट सकेगी। पहले यह अधिकार प्रशासनिक अधिकारियों के पास होने की वजह से निर्णय लेने में अनावश्यक देरी देरी होती थी। - शिव पूजन सिंह यादव, सेवानिवृत्त पुलिस उपाधीक्षक

गोरखपुर में लागू हो सकती है कमिश्‍नर प्रणाली

उच्च प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो गोरखपुर समेत अन्य प्रमुख शहरों में भी यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। पुलिस रेगुलेशन के मुताबिक यह प्रणाली लागू करने के लिए महानगर की आबादी 10 लाख से अधिक होनी आवश्यक है। इस लिहाज से भी जनपद निर्धारित मानक को पूरा करता है। प्रदेश के दो प्रमुख शहरों में नई व्यवस्था लागू होने को लेकर लोगों ने अपनी अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है।

सरकार का प्रयास अच्छा है। दिल्ली व मुंबई आदि शहरों में पहले से ही यह व्यवस्था लागू है। इस व्यवस्था में पुलिस के पास मजिस्ट्रीयल अधिकार भी आ जाते हैं। सरकार की पहल ठीक है लेकिन सरकार को एफआइआर से विवेचना का पार्ट अलग कर देना चाहिए इससे चेक एंड बैलेंस की स्थिति बनी रहेगी। - सर्वेश चंद्र मिश्र, सेवानिवृत आइएएस

सरकार का यह कदम गलत है, इससे पुलिस का तानाशाही और बढ़ेगी। भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। यह जनता के लिए नुकसानदेह होगा। वर्तमान व्यवस्था में पुलिस के ऊपर प्रशासनिक नियंत्रण होने के कारण गलती की गुंजाइश कम रहती है लेकिन नई व्यवस्था लागू होने से पुलिस निर्दोषों का भी एनकाउंटर करेगी। - मधुसूदन त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता

Posted By: Pradeep Srivastava

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