गोरखपुर, जितेन्द्र पाण्डेय। ऐसा वन जिसमें सिर्फ फलदार पौधे हों। उसमें लोगों के अलग-अलग बैठने की व्यवस्था हो। वहां पाथ वे के जरिये लोग वन को निहार सकें और विभिन्न प्रकार के फलों को देखकर रोमांचित हो सकें। प्रदेश के ऐसे पहले फूड फारेस्ट गोरखपुर वन प्रभाग के बांकी रेंज में स्थापित होगा। इस वन को पार्क की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसमें बिना कीटनाशक व बिना रासायनिक उर्वरक से पोधों का विकास किया जाएगा। लोग इस वन से न सिर्फ ताजे फलों की खरीददारी करेंगे, बल्कि वहीं लगे झूले व बेंच पर बैठकर प्राकृतिक हवा में खा भी सकेंगे।

बांकी रेंज में आधे से एक हेक्टेयर में होगा स्थापित

बांकी रेंज के धवई रेस्ट हाउस के पास इस बाग को आधा से एक हेक्टेयर में स्थापित किया जाएगा। इसमें सात अलग-अलग चरणों में भोजन श्रृंखला नजर आएगी। इसका संबंध शाकाहारी वन्यजीवों व पक्षियों से भी होगा। इसमें उगाई जाने वाली दालों से मिट्टी की नाइट्रोजन की मांग पूरी हो सकेगी। इस वन में तालाब की भी स्थापना कराई जाएगी। ताकि मिट्टी की उर्वरा क्षमता भी बढ़ेगी। पक्षियों के आने पर उनकी बीट से इस उपवन को खाद मिल सकेगी।

जुलाई से शुरू होगा काम

फ्रूट फारेस्ट की स्वीकृति मिल चुकी है। जुलाई में बारिश के बाद तेजी से पौधे लगने शुरू हो जाएंगे। इस पार्क का उद्देश्य इंसान से लेकर वन्यजीवों व पक्षियों की भोजन श्रृंखला को तैयार करना है।

इमली, बडहल, जंगल जलेबी को भी मिलेगा नया जीवन

पनियाला, बड़हल, कटहल, अमलतास, जंगल जिलेबी सहित आठ पौधों को वन विभाग ने विलुप्त प्राय श्रेणी में रखा है। फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट आफ इंडिया इस पर शोध कर रहा है। इन विलुप्त प्राय की श्रेणी के पौधों को भी इस वन से नया जीवन मिलेगा। फूड फारेस्ट में इसकी नर्सरी तैयार की जाएगी। ताकि विलुप्त प्राय पौधों की पूर्वांचल में संख्या बढ़ाई जा सके।

फूड फारेस्ट की स्वीकृति मिल चुकी है। जुलाई से पौधारोपण का कार्य भी शुरू हो जाएगा। यह प्रदेशवासियों के लिए बेहद रोचक होगा। इस वन में इंसान से लेकर पशु-पक्षियों के भोजन की श्रृंखला तैयार की जाएगी। - विकास यादव, डीएफओ।

Edited By: Pradeep Srivastava