गोरखपुर, जेएनएन। विश्वविद्यालय व संबद्ध महाविद्यालयों में शैक्षिक सत्र व प्रवेश को लेकर यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग), मानव संसाधन विकास मंत्रालय व राज्य सरकार की अपनी डफली अपना राग है। पहले कोरोना के मद्देनजर मंत्रालय ने बिना परीक्षा के छात्रों को प्रोन्नत करने का निर्देश दिया। इसके बाद यूजीसी ने अंतिम वर्ष की परीक्षाएं अनिवार्य रूप से कराने को लेकर गाइडलाइन जारी कर दी। अभी इन दोनों निर्देशों को लेकर पेंच फंसा ही हुआ था कि प्रदेश सरकार ने रविवार को अगस्त से शैक्षिक सत्र शुरू करने की नई समय सारिणी घोषित कर दी। इन मानकों व निर्देशों में छात्र उलझ कर रह गए हैं। छात्रों की समझ में नहीं आ रहा है कि अब वह क्‍या करें।

कैसे और किन कक्षाओं में पढ़ेंगे छात्र

उच्‍च शिक्षा विभाग ने नए शैक्षिक सत्र 2020-21 को लेकर कैलेंडर तो जारी कर दिया है, लेकिन इसके अनुसार किन कक्षाओं के छात्र पढ़ेंगे अभी भी एक अहम सवाल है। क्योंकि अभी तक न तो प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्रों को अगली कक्षाओं में प्रोन्नत को लेकर कोई स्थिति स्पष्ट हुई है और न ही यूजीसी की अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षाएं अनिवार्य रूप से कराए जाने पर ही कोई निर्णय हुआ है। ऐसे में सरकार का नया शैक्षिक कैलेंडर छात्रों के साथ-साथ विभाग के लिए भी अबूझ पहेली बनकर रह गया है। दीनदयाल उपाध्‍याय गोरखपुर विश्‍वविद्यालय के संबद्ध महाविद्यालयों में स्थिति काफी उहापोह बनी हुई है। विद्यालय प्रबंधतंत्र भी परीक्षाओं को लेकर अनिर्णय की स्थिति में हैं। नये प्रवेश को लेकर भी प्रबंधतंत्र काफी मंथन कर रहा है। जहां तक पढ़ाई की बात है तो वह आनलाइन पढ़ाई को ही विकल्‍प मानकर चल रहे हैं।

परीक्षाओं को लेकर भी शासन के निर्देश का इंतजार

दीनदयाल उपाध्‍याय गोरखपुर विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. विजय कृष्‍ण सिंह का कहना है कि शासन से नई समय सारिणी को लेकर दिशा-निर्देश प्राप्त करने के उपरांत ही इसका पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। बची हुईं परीक्षाओं को लेकर भी शासन के निर्देश का इंतजार है। हमारी तैयारी पूरी है। यदि परीक्षा का निर्देश मिलता है तो हम पहले परीक्षा कराएंगे, इसके बाद समय सारिणी के अनुसार पठन-पाठन कराएंगे।

Posted By: Satish Shukla

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