गोरखपुर, जेएनएन। जिले में शनिवार से दो दिन तक एक बार फिर पाबंदी रहेगी। इस दौरान सभी कार्यालय, बाजार, मंडी बंद रहेंगे। केवल दवा की दुकानें खुलेंगी। सोमवार को राजघाट, तिवारीपुर, कोतवाली एवं गोरखनाथ थाना क्षेत्रों को छोड़कर हर जगह बाजार पूर्ववत खुल जाएंगे। इन चार क्षेत्रों में मंगलवार को पाबंदी समाप्त होगी। रोस्टर की व्यवस्था पहले ही समाप्त हो चुकी है।

बंद रहेंगेे सभी बाजार, मंडी व कार्यालय

शासन ने गुरुवार को साप्ताहिक बंदी बरकरार रखने का फैसला लिया था। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए हर सप्ताह कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए शुक्रवार की रात 10 बजे से ही सोमवार की सुबह पांच बजे तक पाबंदी रहती है। जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि सड़क से लेकर चौराहों तक पर कड़ी निगरानी रहेगी। सभी शहरी व ग्रामीण हाट, बाजार, गल्ला मंडी और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे।

घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं

किसी को भी बेवजह घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी इमरजेंसी और रेलवे व एयरपोर्ट आने-जाने की ही छूट रहेगी। ऐसे लोगों के भी टिकट जांचे जाएंगे। इन दो दिनों के दौरान कोई भी बिना आकस्मिक सेवाओं के बाहर घूमता मिला तो प्रशासन उससे सख्ती से निपटेगा।

परिचय पत्र ही होगा पास

आपातकालीन सेवा से जुड़े लोगों का परिचय पत्र ही पास होगा। आवश्यक सेवाओं से जुड़े व्यक्ति आईडी कार्ड दिखाकर आवगमन कर सकेंगे।

विद्यालय परिसरों को कोरोना जांच शिविर के रूप में प्रयोग न करने की मांग

परिषदीय विद्यालय परिसरों को कोरोना जांच शिविर के रूप में प्रयोग न किए जाने की मांग को लेकर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने बीएसए को ज्ञापन सौंपा। संघ पदाधिकारियों ने शिक्षक हितों को ध्यान में रखकर इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया है कि विद्यालय परिसरों को कोरोना जांच शिविर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। किसी भी ग्राम सभा में कोरोना संक्रमण की आशंका हो रही है तो विद्यालय परिसर में जांच टीम पहुंच जा रही व गांव के कोरोना संदिग्ध लोगों को बुलाकर वहीं विद्यालय में जांच कर रही है। बाद में जांचोपरांत उनमें से तमाम लोग कोरोना पॉजिटिव भी मिल रहे हैं। चूंकि लंबे समय तक विद्यालय कोरंटाइन सेंटर रहे हैं। ऐसे में गांव के प्रधान व अन्य जिम्मेदार विद्यालय को कोरोना निवारण केंद्र समझने लगे हैं।

ज्ञापन में कहा गया है कि पहले शिक्षक विद्यालय नहीं जाते थे, लेकिन अब शिक्षक प्रतिदिन विद्यालय रहते हैं। ऐसी दशा में वहां कोरोना संक्रमण की जांच करना निश्चित रूप से शिक्षकों की सुरक्षा के लिए खतरा है और शिक्षक भयभीत हैं। ऐसे में संघ की मांग है कि विद्यालय परिसर को अब कोरोना जांच शिविर के रूप में इस्तेमाल न किया जाय।

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