महराजगंज: दो माह पूर्व पेट्रोल पंप के मैनेजर से लूट के प्रयास में जब मोबाइल के अलावा कुछ नहीं मिला तो लुटेरों ने असलहे के बल पर उनका नग्न कर वीडियो बना लिया। वीडियो को इंटरनेट मीडिया पर वायरल करने की धमकी देते हुए बदमाश छह लाख की फिरौती मांग रहे थे। मंगलवार को कोतवाली पुलिस व स्वाट टीम ने घटना में शामिल दोनों लुटेरों को देसी तमंचा व एक नकली गन के साथ गिरफ्तार कर मामले का पर्दाफाश कर दिया है।

पुलिस अधीक्षक प्रदीप गुप्ता ने बताया कि 18 मई की रात सिसवा बाबू निवासी शैलेंद्र चौधरी पेट्रोल पंप से जब अपने घर को जा रहे थे, तभी धनेवा-धनेई निवासी आकाश कुमार व असम राज्य के धुबरी जिला थाना सुपचर खोपती खांडा निवासी मुसद्दीकुल ने उन्हें रमपुरवा नहर के पास से असलहे के बल पर रोक लिया और सामान देने को कहा। रुपये के नाम पर जब शैलेंद्र चौधरी के पास से कुछ नहीं मिला तो मोबाइल का सिमकार्ड व मेमोरी चिप निकाल लिया और शैलेंद्र के कपड़े उतरवाकर उसका वीडियो बना लिया। असलहा देख शैलेंद्र ने किसी तरह उनसे अपनी जान की मिन्नत मांगी। तब बदमाशों ने उसे जाने दिया।

आरोपितों ने इस घटना के बाद के एनडीएम कालेज महराजगंज के पास 17 जून को एक और मोबाइल लूट की घटना को अंजाम दिया और फिर उस मोबाइल से पुन: शैलेंद्र से रंगदारी मांगनी शुरू कर दी। रुपये न देने पर शैलेंद्र चौधरी के घर पर डिब्बे में उनकी फोटो पैक कर फेंक कर उनको डराने का भी प्रयास किया गया। पुलिस मामले में आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच कर रही थी। तभी मंगलवार की सुबह इनकी लोकेशन गबड़ुआ के पास मिली। सूचना मिलते ही स्वाट प्रभारी शशांक शेखर राय और कोतवाली पुलिस की टीम ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपितों के खिलाफ लूट और आ‌र्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज कर न्यायालय चालान भेजा गया , जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। तमिलनाडु में मुसद्दीकुल से मिला था आकाश:

धनेवा-धनेई निवासी आरोपित आकाश की मुलाकात असम राज्य के मुसद्दीकुल से तमिलनाडु में हुई थी। कोरोना काल के पहले दोनों तमिलनाडु में एक साथ काम करते थे। कोरोना काल के कारण हुए लाकडाउन के बाद मुसद्दीकुल आकाश के साथ महराजगंज आ गया था। यहां आवश्यकतानुसार दिन में दोनों छोटा-मोटा काम किया करते थे। सदर कोतवाल मनीष सिंह यादव ने बताया कि आरोपितों के पास से एक खिलौना गन भी बरामद हुई है। यह टीम रही शामिल

सदर कोतवाल मनीष कुमार सिंह, स्वाट प्रभारी शशांक शेखर राय, उपनिरीक्षक निरीक्षक भूपेंद्र प्रताप सिंह, रमेश यादव, धनंन्जय सिंह, अजय यादव, ओमप्रकाश, संजय सिंह, विद्यासागर, रामभरोस यादव, राजेश यादव, राजीव यादव व शशीकांत यादव शामिल रहे। एसपी प्रदीप गुप्ता ने बताया कि यह दोनों आरोपित लंबे समय से लोगों की पहले रेकी करते थे और बाद में उनसे लूट की घटनाओं को अंजाम देते थे। दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर पुलिस ने न्यायालय चालान किया है, जहां से न्यायालय ने उन्हें जेल भेज दिया है।

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