गोरखपुर, जेएनएन। पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल स्थित गोरखपुर कैंट-कप्तानगंज-पनियहवा-नरकटियागंज रूट पर अब ट्रेनें 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी। इसके लिए रेलवे प्रशासन रेल लाइन को और मजबूत बना रहा है। ट्रेनों की रफ्तार तो बढ़ेगी पर झटके नहीं लगेंगे। दुर्घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा।  फिलहाल, आधुनिक मशीनों से रेल लाइनों, प्वाइंट और स्लीपर को बदलने का कार्य तेजी के साथ चल रहा है। 

अब तक अधिकतम 100 की गति से ही दौड़ती थीं ट्रेनें

हालांकि, पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने लॉकडाउन में ही कार्य शुरू कर दिया था। 52 की जगह अब 60 किलो ग्राम वजन की रेल लाइनें व स्लीपर लगाए जा रहे हैं। जानकारों के अनुसार नियमित ट्रेनों का संचालन शुरू होने के साथ ही कार्य भी पूरा हो जाएगा। इसके बाद ट्रेनों की गति भी बढ़ जाएगी। वर्तमान में इस रेलमार्ग पर अधिकतम 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चल रही हैं। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार ङ्क्षसह ने कहा कि ट्रैक की स्पीड 100 से बढ़ाकर 110 किमी प्रति घंटा करने की तैयारी चल रही है। रेल लाइन और स्लीपर बदलने का कार्य चल रहा है। विद्युतीकरण पहले ही पूरा हो चुका है।

गोरखपुर में बने मेमू ट्रेन की रेक का परीक्षण शुरू

गोरखपुर में तैयार इलेक्ट्रिक से चलने वाली मेमू ट्रेन (मेनलाइन इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट) की रेक का परीक्षण शुरू हो गया है।रेन संबंधित इंजीनियरों की निगरानी में गोरखपुर से थावे जंक्शन के बीच चलाई जाएगी। इस दौरान विकल्प के रूप में एक इंजन भी तैयार रहेगा। मेमू ट्रेन की तैयार रेक में छह यात्री (ट्रेलर कोच) व दो ड्राइवर मोटर कोच लगे हैं। ट्रेन को मेन रेल लाइन पर सुबह 10 बजे से चलाने की योजना है। परीक्षण सफल होने के बाद कारखाने में पूर्वोत्तर रेलवे ही नहीं दूसरे जोन की मेमू ट्रेनों की मरम्मत भी शुरू हो जाएगी। फिलहाल, रेलवे बोर्ड ने एक वर्ष में मेमू ट्रेनों की 100 रेक की मरम्मत का लक्ष्य तय किया है। पूर्वोत्तर रेलवे का गोरखपुर पहला यांत्रिक कारखाना है जहां मेमू ट्रेनों की रेक की भी मरम्मत शुरू हुई है। परीक्षण सफल होने के बाद इसका निर्माण शुरू किया जाएगा।

Edited By: Pradeep Srivastava