गोरखपुर, जेएनएन। विदेशी पक्षियों से गुलजार सिद्धार्थनगर जनपद का मझौली सागर अब नए पर्यटक स्थल के रूप में विकसित होगा। छात्रों के लिए यह शोध स्थल भी बनेगा। 86.2 हेक्टेयर में फैले इस सागर में एक साथ अब तक 190 सारस दिख चुके हैं। कपिलवस्तु स्तूप से सागर की दूरी महज डेढ़ किमी है। भगवान गौतम बुद्ध के अनुयायी यहां आते रहते हैं। इसके महत्व को देखते हुए वन विभाग इस झील को नया लुक देने में जुटा हुआ है।

मझौली सागर में दिसंबर से मार्च तक करीब चार सौ विदेशी प्रजाति की पक्षियां आती हैं। इन साइबेरियन पक्षियों को देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं, लेकिन अब तक पर्यटकों के लिए कोई सुविधा नहीं थी। ब्लैक नेक, स्टार्क, एशियन ओपेन बिल, नार्दन, ¨पक्टेल आदि पक्षियों के लिए यह जगह काफी मुफीद है। इस स्थान को विकसित करने के लिए शासन से 53 लाख रुपये के बजट की मांग की गई है, जो शीघ्र अवमुक्त होने की उम्मीद है।

वन विभाग ने यूको टूरिज्म प्रोजेक्ट बनाया

वन विभाग ने यूको टूरिज्म प्रोजेक्ट बनाया है। वनस्पति विज्ञान में शोध करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए एक अच्छा अवसर मिलेगा। देहरादून में टूर गाइड की तर्ज पर यहां भी चार-पांच टूर गाइडों की तैनाती होगी। चार लोगों की इको डेवलप्मेंट कमेटी का गठन होगा। यह कमेटी ही इसका संचालन करेगी। सागर से जलकुंभी हटाए जाएंगे। रोजगार के अवसर मिलेंगे। पिछले दिनों सांसद जगदंबिका पाल, जिलाधिकारी दीपक मीणा और डीएफओ आकाश दीप बधावन के बीच इसपर चर्चा हुई थी, जिसे अमली जामा पहनाना बाकी है। 

पक्षियों को बैठने के लिए बनेंगे टॉपू

मझौली सागर में पक्षियों के बैठने के लिए एक मीटर की ऊंचाई वाले टापू बनाए जाएंगे। झील के चारो तरफ बेंच, कैंटीन व व्याख्यान कक्ष-प्रोजेक्टर, कुर्सी मेज आदि का इंतजाम रहेगा। पुस्तकालय-पक्षियों के बारे में पूरी जानकारी होगी व ग्राम, क्षेत्र एवं विद्यालय स्तरीय शिविर कार्यक्रम,सोलर लाइट की व्यवस्था, जीवन रक्षक स्वी¨मग जैकेट के इंतजाम रहेंगे। सिद्धार्थनगर के डीएफओ आकाश दीप बधावन मझौली सागर वेट लैंड के विकास की रूपरेखा खींच ली गई है। शासन से शीघ्र ही बजट आने वाला है। नए वर्ष में पर्यटकों के लिए यह सौगात होगा।

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