गोरखपुर, जेएनएन। जैसा टॉयलेट (शौचालय) हवाई जहाज में होता है, बिल्कुल वैसा ही हमसफर एक्सप्रेस में होगा। इस बायो वैक्यूम हाइब्रिड टॉयलेट से ट्रेन में गंदगी फैलेगी न ही दुर्गंध। खास बात यह है कि यह हाइटेक टॉयलेट गोरखपुर के यांत्रिक कारखाना में तैयार होगा।

रेलवे बोर्ड ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत 160 टायलेट की डिमांड पूर्वोत्तर रेलवे को भेजी है। प्रयोग सफल रहा तो भारतीय रेल की अन्य ट्रेनों में भी इसे लगाया जाएगा। फिलहाल गोरखपुर से आनंद विहार के बीच चलने वाली हमसफर एक्सप्रेस के 43 कोचों में 121 इंडियन जबकि 39 वेस्टर्न स्टाइल के टॉयलेट लगाए जाएंगे।

रेलवे इंजीनियरों के मुताबिक हमसफर में इस समय बायोटायलेट लगे हैं। इससे स्टेशन और पटरियों पर गंदगी तो नहीं फैलती है, लेकिन कई बार शौचालयों के भर जाने और दुर्गंध के चलते यात्रियों को दिक्कत होती है। नया बायो वैक्यूम हाइब्रिड टॉयलेट मानव मल को सोखकर लिक्विड बना देता है, जिसे निर्धारित स्थल पर निस्तारित कर दिया जाता है।

और बाहर निकल जाएगी दुर्गंध

टॉयलेट में उठने वाली दुर्गंध से निजात के लिए इस आधुनिक डिजायन के टॉयलेट में वेंचुरी फ्लूम लगाया जाएगा। इसके तहत बायो टॉयलेट में एस टाइप ट्रैप और फ्रेशनर लगाए जा रहे हैं, जो गंदी हवा को बाहर निकाल देंगे।

एलएचबी कोचों में बायो वैक्यूम हाइब्रिड टॉयलेट लगाए जाएंगे। निर्माण के लिए आर्डर दिया गया है। जल्द ही इसे कोचों में लगाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। - पंकज कुमार सिंह, सीपीआरओ, एनई रेलवे।

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