गोरखपुर, उमेश पाठक। Fortified Rice: कोटे की दुकान से मिलने वाले जिस चावल को प्लास्टिक का कहकर खाने से इनकार किया जा रहा है, असल में वह प्लास्टिक नहीं बल्कि पोषण देने वाला चावल है। चंदौली एवं पंजाब से लाया गया यह चावल कुपोषण के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए एकीकृत बाल विकास सेवा (आइसीडीएस) एवं मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) के तहत वितरित किया जाना है। शासन की मंशा है कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भविष्य में इसी तरह के चावल का वितरण किया जाए। इसमें आयरन, विटामिन बी 12, फाेलिक एसिड जैसे पोषक तत्व होते हैं। हालांकि जिले में अभी तक यह योजना लागू नहीं है लेकिन कोटे की कुछ दुकानों से इसका वितरण समय-समय पर किया जा रहा है।

प्लास्टिक का चावल समझ सेवन नहीं कर रहे लोग

पिछले कुछ वर्षों से लोगों में चर्चा है कि चीन से प्लास्टिक का चावल आ रहा है। इसीलिए असामान्य चावल देखकर लोग इसे प्लास्टिक का मान रहे हैं और कोटेदार से विरोध जता रहे हैं। शहर के नंदानगर क्षेत्र के लोगों ने कोटे की दुकान से प्लास्टिक का चावल मिला बताकर विरोध जताया है। उन्हें यह चावल पिछली बार मिला था लेकिन जब इधर प्रयोग किया तो उन्हें इसकी गुणवत्ता को लेकर शंका हुई। उन्होंने कोटेदार से यह बात बताई तो कोटेदार की ओर से कोई स्पष्टीकरण देने की बजाय, चावल की जगह गेहूं का वितरण कर दिया गया। चावल का प्रयोग करने वाले जंगल रामगढ़ उर्फ रजही निवासी जयसिंह मौर्य ने कहा कि 15 दिन पहले चावल लाए थे, प्रयोग करते समय कुछ अजीब लगा।

सामान्‍य चावल से अलग है यह चावल

राधेश्याम निषाद का कहना है कि चावल लाकर रख दिया गया था, जब इसे पकाने के लिए पानी में डाला गया तो वह प्लास्टिक सा नजर आने लगा। कुछ इसी तरह का अनुभव राजाराम मौर्य भी सुनाते हैं। हालांकि विशेषज्ञ इसे गलत धारणा करार दे रहे हैं। कुछ दिन पहले भरोहिया ब्लाक के रन्नाडीह, हरपुर एवं मड़हा के निवासियों ने भी कोटे से मिले चावल को प्लास्टिक का बताकर विरोध किया था। बाद में उन्हें बताया गया था कि सामान्य चावल से अलग नजर आने वाला यह चावल फोर्टिफाइड यानी पोषणयुक्त है।

यह होता है फोर्टिफाइड चावल, ऐसे होता है तैयार

कुपोषण के बढ़ते मामलों को देखते हुए मिलरों को फोर्टिफाइड चावल तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। राइस मिल में एक ब्लेंडिंग मशीन लगाई जाती है। चावल के चूरे के साथ विटामिन, मिनरल मिलाकर उसे चावल के रूप में बाहर निकाला जाता है। इस चावल का सेवन बच्चों एवं महिलाओं के लिए काफी अच्छा माना जाता है। पूर्ति निरीक्षक अरुण सिंह बताते हैं कि जिले में बहुत कम मात्रा में फोर्टिफाइड चावल आया है, कुछ कोटे की दुकानों से इसे वितरित किया गया था। यह चावल फायदेमंद होता है। अभी चंदौली एवं पंजाब के कुछ शहरों से इस तरह का चावल समय-समय पर आता है।

धीरे-धीरे सभी राइस मिल में होगी व्यवस्था

डिप्टी आरएमओ राकेश मोहन पांडेय का कहना है कि फोर्टिफाइड चावल थोड़ा असामान्य होता है। दो महीने में यह चावल वितरण के लिए आया है। जिस चावल की कुटाई मिलों में होती है, उसमें काफी चमक होती है। कई बार इस तरह के फोन आते हैं कि प्लास्टिक का चावल मिल रहा है जबकि यह बात पूरी तरह से गलत है। लोगों में गलत धारणा बनी है। यह चावल पोषण की दृष्टि से काफी बेहतर है। शासन की ओर से दो बार पत्र जारी कर मिलरों को ब्लेंडिंग मशीन लगाने एवं फोर्टिफाइड चावल तैयार करने को कहा गया है। धीरे-धीरे सभी राइस मिल में इस तरह का चावल तैयार होगा। इसी चावल को भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) के गोदाम में भेजा जाएगा और वहीं से वितरण के लिए जाएगा। भविष्य में बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन एवं वितरण शुरू होने के बाद लोगों के लिए यह सामान्य सी बात हो जाएगी।

Edited By: Pradeep Srivastava