गोरखपुर, जेएनएन। ये हैं प्रियंका कुशवाहा, इन्होंने करीब छह दर्जन लड़कियों को अब तक स्वावलंबी बना दिया है। गरीब घरों से संबंध रखने वाली इन लड़कियों को निश्शुल्क ब्यूटीशियन, कुशन मेकिंग एवं हस्तशिल्प का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार के लायक बना चुकी हैं और बना भी रही हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद इन लड़कियों को कभी उनके संपर्को से तो कभी प्रियंका के सहयोग से रोजगार मिलता रहता है। प्रियंका कुशवाहा ने देवरिया आइटीआइ से हेयर एंड स्किन का ्रप्रशिक्षण प्राप्त किया। उसके बाद एक प्रतिष्ठित संस्था से स्किन ट्रीटमेंट का कोर्स किया। गरीब घरों को लड़कियों को देकर उनके मन में अपने इस कौशल को बांटने का ख्याल आया। पड़ोस की एक महिला ने उन्हें सेवा भारती संस्था के बारे में बताया। वहां से प्रेरित होकर प्रियंका ने 15 जून 2016 को सुभाषचंद्रबोस नगर स्थित अपने घर में मां शारदा सौंदर्य प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ किया। प्रियंका का फोकस दुर्बल आयवर्ग के घरों की लड़कियों को स्वावलंबी बनाने पर है। अब तक वह 72 लड़कियों को प्रशिक्षण प्रदान कर चुकी हैं। उनमें से अधिकतर या तो निजी स्तर पर आय अर्जित कर रही हैं या कहीं नौकरी कर। ब्यूटीशियन के अलावा कुशन बनाना व पैराशूट के धागे से मिरर स्टैंड आदि वस्तुओं के निर्माण का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। इन वस्तुओं के लिए बाजार भी प्रियंका उपलब्ध कराती हैं। प्रशिक्षण में प्रयोग होने वाली वस्तुओं की व्यवस्था भी वह स्वयं करती हैं। नयागांव की रहने वाली ज्योति भारती के घर की हालत काफी खराब थी। पिता की आय का कोई ठिकाना नहीं, मां दूसरे के घरों में काम करके परिवार चलाती थीं। कच्चे मकान में परिवार किसी प्रकार गुजर-बसर कर रहा था। ज्योति, प्रियंका के संपर्क में आई और छह महीने का कोर्स किया। कुछ दिन तक एक ब्यूटी पार्लर में काम किया। फिर शादी व अन्य कार्यक्रमों में घर-घर जाकर दुल्हन सजाने, मेहंदी लगाने का काम करने लगीं। उन्हें सात से 10 हजार की आय महीने में होती है। पक्का घर बनवाने में ज्योति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी तरह माधोपुर गांव की रहने वाली किरन साहनी की मां का बचपन में ही निधन हो गया था। पिता का परिवार से बहुत लगाव न होने के कारण जैसे-तैसे चाचा-चाची ने पाला। प्रियंका के संपर्क में आने के बाद किरन को ब्यूटीशिन का प्रशिक्षण दिया गया। वह अब लोगों के घरों में जाकर मेहंदी लगाकर व सौंदर्य के अन्य कार्यो से आय अर्जित करती हैं। स्वावलंबी बनकर घर की आर्थिक हालत सुधारने वाली ये लड़कियां कुछ उदाहरण मात्र हैं। क्या कहती हैं प्रियंका स्वयं प्रशिक्षित होने के बाद सोचा कि और जरूरतमंद लड़कियों को प्रशिक्षित किया जाए। इस कार्य में सेवा भारती से प्रोत्साहन मिला। लड़कियां जब अपने परिवार के काम आती हैं तो सुकून मिलता है। प्रियंका कुशवाहा