गोरखपुर, जेएनएन। दीप पर्व पर सतरंगी रोशनी से सांझ झिलमिलाएगी। पटाखों की गूंज असत्य पर सत्य की विजय का अहसास कराएगी। पूरा शहर इस खूबसूरत नजारे को देखने के लिए न केवल बेताब है बल्कि सबने पूरी तैयारी कर रखी है। इस तैयारी का सिलसिला शनिवार की देर रात तक चला।

दूध, दही और घी से पितृ का श्राद्ध करें

सुबह दैनिक कार्य से निवृत्त होकर पितृगण और देवताओं का पूजन करें। संभव हो तो दूध, दही और घी से पितृ का श्राद्ध करें। पूरे दिन उपवास या फलाहार कर गोधूलि बेला में श्रीगणेश, कलश, षोड्श मातृका और महालक्ष्मी का षोड्षोपचार पूजन करें। थाली में विभिन्न रंगों का चित्र बनाकर 26 दीप जलाएं। एक चौमुखा दीप भी रखें और दीपमालिका का पूजन करें। कोशिश करें कि चौमुखा दीपक रातभर जले। पूजन के अनन्तर प्रदक्षिणा कर मां भगवती को पुष्पांजलि समर्पित करें। अर्धरात्रि के बाद घर की स्त्रियां सूप आदि बजाकर दरिद्रा देवी का निष्कासन करें।

दिवाली में पूजा का मुहूर्त

आचार्य पं. शरद चंद्र मिश्र के मुताबिक इस बार कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या का संयोग दो दिन हो रहा है। रविवार को सूर्योदय 6 बजकर 24 मिनट और चतुर्दशी तिथि का मान 11 बजकर 51 मिनट तक है। उसके बाद अमावस्या तिथि का चित्रा नक्षत्र संपूर्ण दिन और सुबह 4:24 बजे तक रहेगा। इसमें पद्मा नामक महाऔदायिक योग है। अमावस तिथि 28 अक्टूबर को 9:44 मिनट तक है। रविवार की शाम को सायंकाल प्रदोष काल में अमावस्या होने से यह समयावधि श्रीगणेश, महालक्ष्मी पूजा और दीपोत्सव के लिए विशेष प्रशस्त करेगी।

सतरंगी झालरों से सज गया पूरा शहर

शनिवार की देर शाम शहर के सभी घरों की चमक दिवाली का पूूर्वाभास रही। हर घर सतरंगी झालरों से सज गए। घरों में दिवाली के दिन की पूजा के लिए खास तैयारी शनिवार सुबह से ही शुरू हो गई। लोगों ने घरों की सफाई की और पूजा वाले स्थान को सजाया। दीया और पूजा सामग्री की खरीद के लिए बाजार गए। धन की देवी लक्ष्मी और समृद्धि के देवता गणेश की पूजा के लिए लोगों ने उनकी मूर्तियों की खरीदारी की। लावा, गट्टा, मिठाई की दुकानों पर भी जमकर भीड़ देखी गई। घर को सजाने और पूजा में चढ़ाने के लिए फूल-माला की दुकानों पर लोगों की आमदरफ्त बनी रही। 

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