गोरखपुर, जागरण संवाददाता। शहीद अशफाक उल्‍ला खां प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) के जानवरों के लाड-दुलार के लिए वन्यजीव प्रेमियों ने 6.24 लाख रुपये खर्च कर दिए। शेर, बाघ, मोर, हिरन सहित 34 जानवरों को गोद लिया था। बावजूद इसके चिड़ियाघर प्रशासन गोद लेने वालों का नाम बोर्ड पर डिस्प्ले करने के लिए 100 रुपये भी नहीं खर्च कर सका।

बाडे पर लगाया जाना था गोद लेने वाले के नाम का बोर्ड

चिडिय़ाघर प्रशासन ने बीते 19 मार्च को जानवरों के गोद लेने से संबंधित नियमावली तैयार करके उसे प्रसारित किया कि गोद लेने वाले व्यक्ति अथवा संबंधित संस्था का नाम बाड़े के बाहर एक डिस्प्ले बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाएगा। जिसमें यह लिखा होगा कि इस व्यक्ति अथवा संस्था ने इस वन्यजीव इस समय से इस समय तक के लिए गोद लिया है। उद्देश्य था कि डिस्प्ले बोर्ड पर लोग वन्यजीव प्रेमियों का नाम देखकर उत्साहित होते और लोग वन्यजीवों को गोद लेने के लिए आगे आते, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसके चलते चिडिय़ाघर प्रशासन के पास वर्तमान में जानवरों को गोद लेने के लिए कोई आवेदन ही नहीं आया है।

जानिए क्या है जानवरों को गोद लेने की प्रक्रिया

जानवरों को गोद लेने के लिए संबंधित व्यक्ति अथवा संस्था को चिडिय़ाघर में एक आवेदन देना होगा। उसमें बताया जाएगा कि वह किस जानवर को कब से कब तक के लिए गोद लेना चाहते हैं। उन्हें उस समय तक की धनराशि शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान गोरखपुर सोसाइटी के खाते में जमा करनी होगी। यह धनराशि चेक, बैंक ड्राफ्ट, आरटीजीएस के माध्यम से सोसाइटी के खाते में जाएगी। धनराशि प्राप्त होने के 10 दिन बाद से गोद लिए जाने की योजना लागू होगी। इसके तहत गोद लेने वाले व्यक्ति को एक वर्ष तक के लिए 18 विशेष टिकट चिडिय़ाघर घूमने के लिए दिये जाएंगे। तीन माह तक जानवरों को गोद लेने वाले को छह टिकट दिया जाएगा। व्यक्ति जिस जानवर को जिस समय के लिए गोद लेगा, उस समयावधि तक उसका नाम संबंधित जानवर के बाड़े पर डिस्प्ले किया जाएगा। इसके साथ ही गोद लेने वाले व्यक्ति को चिडिय़ाघर की तरफ से एक प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा।

इन्होंने लिया था शेर व बाघ को गोद

शेर को डीबी ङ्क्षसह व रंजना ङ्क्षसह ने तीन माह तक के लिए गोद लिया था। बाघ को इंडिया ग्लाइकोल लिमिटेड ने गोद लिया था। इसके अलावा 14 लोगों ने मोर, हिरन, चीता, घडिय़ाल, मगरमच्छ को गोद लिया था। इसमें राजेश कुमार को छोड़कर सभी की गोद लेने की अवधि खत्म हो चुकी है।

बजट न होने की वजह से नहीं लग पा रहा था बोर्ड

चिडिय़ाघर के निदेशक डा. एच राजा मोहन बताते हैं कि बोर्ड पर नाम डिस्प्ले किये जाने के लिए चिडिय़ाघर के पास बजट नहीं था। अब धीरे-धीरे कर लोगों का नाम डिस्प्ले बोर्ड पर लगाया जा रहा है। चार से पांच लोगों का बोर्ड लगाया जा चुका है। समयावधि भले समाप्त हो गई हो, लेकिन लोगों का नाम बोर्ड पर डिस्प्ले किया जाएगा और बताया जाएगा कि इन्होंने इस जानवर को गोद लिया था।

Edited By: Navneet Prakash Tripathi