कुशीनगर : सर्प दंश से मौत पर आश्रित को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था है, लेकिन मिल नहीं पाती है। कारण, सर्प दंश की पुष्टि पोस्टमार्टम के दौरान भी नहीं हो पाती है। इसलिए शव का विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए भेजा जाता है। वहां भी विसरा में सर्प दंश से मौत की पुष्टि नहीं हो पाती है। ऐसे में अब विसरा सुरक्षित नहीं किया जाएगा। पोस्टमार्टम के सात दिनों में मृत व्यक्ति के आश्रित को अहेतुक सहायता दी जाएगी।

दो अगस्त 2018 को सर्प दंश को राज्य आपदा घोषित करते हुए सर्प दंश से मृत्यु की दशा में प्रत्येक मृतक के आश्रित को चार लाख रुपये की अहेतुक सहायता देने की योजना लागू की गई थी। यह सहायता राशि तभी मिलती है, जब इसकी पुष्टि हो जाती कि मौत सर्प दंश से हुई है। फारेंसिक स्टेट लीगल सेल के अनुसार सर्प दंश के प्रकरणों में विसरा सुरक्षित करने का कोई औचित्य नहीं हैं, क्योंकि जांच में सर्प दंश से मृत्यु प्रमाणित नहीं होती। सेल के परामर्श के क्रम में अपर मुख्य सचिव पंचायती राज ने आदेश जारी कर दिया है कि अब सर्प दंश से मृतक का विसरा सुरक्षित न किया जाए।

अब यह होगी प्रक्रिया

सर्प दंश मृत व्यक्ति का पंचनामा भरा जाएगा। पोस्टमार्टम भी कराया जाएगा। पोस्टमार्टम के बाद विसरा सुरक्षित नहीं रखा जाएगा। सीएमओ डा. सुरेश पटारिया ने बताया कि सरकार ने चार लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। मृत व्यक्ति का अंत्य परीक्षण अनिवार्य रूप से होगा।

सर्पदंश से महिला की मौत

कप्तानगंज थाना क्षेत्र के गांव सोमली के टोला अटकहिया में सर्पदंश से मंगलवार की शाम एक महिला की मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। 45 वर्षीय रेशमा सिंह मंगलवार की देर शाम गांव के बाहर टहलने गईं थीं। जहां उन्हें जहरीले सर्प ने डंस लिया। स्वजन महिला की झाड़ फूंक कराते रहे। सुधार न होने पर देर रात सीएचसी कप्तानगंज ले गए, जहां डाक्टर ने मृत घोषित कर दिया।

Edited By: Jagran