गोरखपुर, जेएनएन। पूर्वांचल के सांस्कृतिक इतिहास में सोमवार की शाम एक नया अध्याय जुड़ गया। कभी बदहाली के बीच जंगलों में जीवन गुजराने को मजबूर वनटांगियां महिलाओं ने फैशन-शो के रैंप पर कैटवाक किया। उन्हें यह अवसर दिया था पूर्वी महोत्सव के मंच पर यामिनी कल्चरल इंस्टीट्यूट इंटरटेनमेंट ने। पहले थोड़ी झिझक, लेकिन बाद में आत्मविश्वास दिखाकर वनटांगियां महिलाओं ने मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया।

कैटवाक के लिए दी गई थी ट्रेनिंग

समाज की मुख्यधारा में शामिल हो चुके वनटांगिए अब आधुनिकता की दौड़ में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार हैं। इसकी बानगी इंटरनेशनल देलही पब्लिक स्कूल, कुसम्ही के प्रांगण में आयोजित पूर्वी महोत्सव में देखने को मिली। इसके लिए उन्हें बकायदा ट्रेनिंग दी गई।

इंस्टीट्यूट की चेयर पर्सन सोनिका सिंह ने बताया कि वनटांगियां महिलाओं को रैंप पर कैटवाक कराने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। रैंप पर उतरने के दौरान महिलाएं असहज महसूस न करें, इसके लिए उनकी हेयर स्टाइल, मेकअप और कपड़ों में परंपरा का पूरा ध्यान रखा। कैटवाक के लिए 15 महिलाओं को ट्रेनिंग दी गई थी।

बोलीं, वनटांगियां महिलाएं

रैंप पर जाने में बहुत झिझक लग रही थी। कई बार सोचा कि, मना कर दूं। लेकिन बाद में हिम्मत करके फैशन-शो के लिए खुद को तैयार किया। बहुत अच्छा लगा। - केंतुली

लोगों को टीवी पर देखती थी तो इच्छा होती थी कि मुझे भी ऐसा अवसर मिले। पता नहीं था कि अवसर मिल ही जाएगा। इसके लिए सबको धन्यवाद। - अंजलि

आसान टास्क नहीं था। हमें केवल कैटवाक करना ही नहीं सिखाना था बल्कि उनकी झिझक और शर्म भी दूर करनी थी। कई बार निराशा हुई लेकिन हमने भी हार नहीं मानी और सफलता मिल ही गई। इस कार्यक्रम के बाद वनटांगियों के विकास को लेकर हमारा हौसला और बढ़ा है। - बलराम सैनी, कोच

Posted By: Pradeep Srivastava

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