गोरखपुर, जेएनएन। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (दीदउ गोविवि) का 39 वां दीक्षा समारोह 12 अप्रैल को दीक्षा भवन में आयोजित किया जाएगा। अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी। वह सत्र 2019-20 की स्नातक और स्नातकोत्तर परीक्षाओं में सर्वोच्‍च अंक हासिल करने वाले मेधावियों को मेडल प्रदान करेंगी। दीक्षा भाषण के लिए मुख्य अतिथि भी जल्द ही तय कर लिए जाएंगे। यह निर्णय दीक्षा समारोह के संयोजक और सह संयोजकों की बैठक में लिया गया। बैठक प्रशासनिक भवन के कमेटी हाल में हुई। अध्यक्षता कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने की।

कवि सम्‍मेलन और कालेजों के बीच होगी प्रतियोगिता

बैठक में तय हुआ कि दीक्षा सप्ताह का आयोजन होगा, जो पांच अप्रैल से शुरू होगा। इसके अंतर्गत विशेष व्यख्यान, कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक संध्या आयोजित की जाएगी। विश्वविद्यालय और संबद्ध कालेजों के बीच प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा। लोगो की उत्कृष्ट डिजाइन बनाने वाले विद्यार्थी को पुरस्कृत किया जाएगा। आयोजन के लिए जल्द ही समितियां गठित की जाएंगी। इस अवसर पर 20-22 मार्च तक आयोजित होने वाले नाथपंथ के वैश्विक प्रदेय विषयक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार की समीक्षा भी की गई। बैठक में सभी समितियों को तैयारियों में तेजी लाने का निर्देश दिया गया।

छात्रों के व्यक्तित्व विकास के लिए लिए खेल जरूरी

विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.अजय कुमार सिंह ने कहा कि खेल छात्रों के व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक है। खेल के माध्यम से मन और मस्तिष्क दोनों स्वस्थ रहता है। खेल में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी होनी चाहिए न कि प्रतिद्वंदिता। छात्रों से अपेक्षा है कि आयोजकों का सहयोग करें तथा खेल को खेल भावनाओं से ही खेले। वह विश्वविद्यालय में सेंट्रल जोन डेलीगेसी की ओर से ग्यारह दिवसीय खेलकूद प्रतियोगिता का शुभारंभ कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। बतौर विशिष्ट अतिथि नैक के अध्यक्ष सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने प्रतिभा गी छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन किया। अध्यक्षता करते हुए डेलीगेसी के उपाध्यक्ष डा.सुधाकर लाल श्रीवास्तव ने शतरंज की उत्पत्ति का श्रेय भारत को देते हुए कहा कि इसे महाभारत काल में विशेष चतुरंग के नाम से जाना जाता था। सस्सा नामक व्यक्ति ने इसे मैदान से लाकर इंडोर गेम के रूप में विकसित कर राजा का मनोरंजन किया। भारत से यह खेल फारस, फारस से अरब, अरब से दक्षिण यूरोप, यूरोप से स्पेन पहुंचकर परिष्कृत रूप में विकसित हुआ। आज यह पूरे देश में शतरंज के लोकप्रिय खेल के रूप में स्थापित है।

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