गोरखपुर, जेएनएन। प्रदेश की राज्यपाल व राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल का कहना है कि शिक्षा में उत्कृष्टता अपरिहार्य है। उत्कृष्टता के अभाव में हमारा अस्तित्व के सामने चुनौतियां बढ़ जाती हैं। कुलाधिपति बुधवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 38वें दीक्षा समारोह में अध्यक्षीय संबोधन दे रहीं थीं। उन्होंने आयोजन में मौजूद शिक्षकों और छात्रों से अपील करते हुए कहा कि वह उत्कृष्टता के प्रति आग्रही बनें और वर्तमान स्थिति में बदलाव के लिए प्रयास करते रहें।

नई और मौलिक शोध जरूरी

सामाजिक सरोकार से जुड़े शोध पर बल देते हुए कुलाधिपति ने ब्रिटेन, अमेरिका का उदाहरण दिया और कहा कि नई और मौलिक शोध के जरिए ही आज उक्‍त देश श्रेष्ठता के इस मुकाम पर हैं और दुनिया को राह दिखा रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की करते हुए कहा कि वह शोध में मौलिकता को महत्व दें। क्षेत्रीय आवश्यकताओं को पूर्ति करने वाले शोध को बढ़ावा दें। ऐसा करके ही हमारा देश भी दुनिया का मार्गदर्शक बन सकता है। रवींद्रनाथ टैगोर के सर्वांगीण विकास की अवधारणा की चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों सहित समाज के अंतिम व्यक्ति में भी जरूर दिखना चाहिए।

पठन-पाठन सामग्री देने पर सराहना

समारोह के दौरान भटहट ब्लाक बूढ़ाडीह परिषदीय विद्यालय के बच्चों को पठन-पाठन सामग्री देने की सराहना करते हुए कहा कि विद्यालय के शिक्षक सामग्री में शामिल पुस्तकों को अपनी लाइब्रेरी का हिस्सा बनाएं और इन पुस्तकों की पहुंच सभी बच्चों तक सुनिश्चित करें। अपने संबोधन में उन्होंने दहेज प्रथा की आलोचना करते हुए स्वर्ण पदक हासिल करने वाले विद्यार्थियों से अपील करते हुए कहा कि वह इस सोने को अपने शो-केस का हिस्सा बनाएं, लेकिन यह भी संकल्प लेें कि वह अपने विवाह में किसी तरह की स्वर्ण की वस्तुएं न तो मांगेंगे और न ही देंगे।

Posted By: Satish Shukla

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